प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य 1172 एवं प्रधानाध्यापक 1475 पदों पर भर्ती के आवेदन शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 13 साल बाद आठ अक्तूबर से इस भर्ती के आवेदन प्रस्तावित हैं। इस बीच नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दायर कर दी हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दुर्गेश कुमार और नौ अन्य की ओर से 28 सितंबर को याचिका दायर की गई है। सर्वाधिक विरोध बीएड और परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बीएड नियुक्त हजारों शिक्षक आवेदन से वंचित हो जाएंगे।
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वहीं परास्नातक में 50 प्रतिशत की अनिवार्यता संबंधी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की कोई गाइडलाइन नहीं होने के बावजूद इसे लागू करना अनुचित है। लिहाजा नियमानुसार पूर्व से नियुक्त प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापकों को अनुभव के आधार पर बीएड प्रशिक्षण से छूट प्रदान करने तथा बीएड के समकक्ष (एलटी आदि) प्रशिक्षणों को स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं।
दो सितंबर को जारी संशोधन में प्रधानाचार्य भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) और केन्द्र/ राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता या सहायक अध्यापक या हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्यूनतम चार वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए मान्य किया गया है। प्रधानाध्यापक भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) अथवा बीपीएड की उपाधि अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास केन्द्र/राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता अथवा सहायक अध्यापक अथवा जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्यूनतम चार वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। अभ्यर्थी की आयु 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए।

