गजरौला। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों पर विभागीय स्तर से लगातार अलग-अलग जिम्मेदारियां दिए जाने का मामला सामने आया है। समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के अलावा ऐसे कार्यों में भी लगाया जा रहा है, जिनका सीधा संबंध विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने से नहीं है। इससे शिक्षकों के कार्यभार और विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े कार्यों के लिए भी बड़ी संख्या में परिषदीय शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। खबर के अनुसार, 1,800 से अधिक परिषदीय शिक्षकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं आगामी निपुण आकलन को देखते हुए भी शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का दबाव है।
21 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच निपुण आकलन
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन करने के लिए निपुण आकलन की प्रक्रिया प्रस्तावित है। समाचार रिपोर्ट में बताया गया है कि 21 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच निपुण आकलन होना है। ऐसे में शिक्षकों को बच्चों की तैयारी, कक्षा संचालन और विभागीय गतिविधियों के साथ-साथ अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं।
शिक्षकों का कहना है कि विद्यालयों में पहले से ही शिक्षण कार्य के अलावा विभिन्न विभागीय पोर्टल, ऑनलाइन सूचनाएं, सर्वे, अभिलेख और अन्य प्रशासनिक कार्य कराए जाते हैं। अब अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने से पढ़ाई के लिए उपलब्ध समय प्रभावित हो सकता है।
सरकारी शिक्षक, लेकिन जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रहीं
परिषदीय शिक्षकों की मूल जिम्मेदारी विद्यालय में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। इसके साथ विभाग द्वारा समय-समय पर कई अन्य कार्य भी सौंपे जाते हैं। शिक्षक संगठनों की ओर से लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए, ताकि वे अपना पूरा ध्यान बच्चों की पढ़ाई पर लगा सकें।
रिपोर्ट में विभागीय कर्मचारियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि जिन कार्यों को अन्य स्तर के कर्मचारियों के माध्यम से कराया जा सकता है, उनकी जिम्मेदारी भी शिक्षकों को दी जा रही है। इससे विद्यालयों में नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
निपुण लक्ष्य पूरा करने के बीच बढ़ा दबाव
सरकार की ओर से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की बुनियादी भाषा और गणितीय दक्षता सुधारने के लिए निपुण भारत मिशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत शिक्षकों को बच्चों के सीखने के स्तर पर लगातार काम करना होता है।ऑनलाइन कोर्स चुनें
ऐसे में शिक्षकों का तर्क है कि यदि उन्हें लगातार दूसरे विभागीय और प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाएगा तो कक्षा में बच्चों को पर्याप्त समय देना चुनौतीपूर्ण होगा। खासकर निपुण आकलन से पहले शिक्षकों को बच्चों की शैक्षिक प्रगति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
शिक्षकों में बढ़ रहा असंतोष
अलग-अलग प्रकार की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर शिक्षकों में असंतोष की स्थिति बन रही है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें एक ओर विद्यालय में शिक्षण कार्य पूरा करना होता है, वहीं दूसरी ओर विभागीय निर्देशों के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी पूरी करनी पड़ती हैं।
शिक्षकों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए शिक्षक को अधिक से अधिक समय कक्षा में देना जरूरी है। यदि शिक्षक गैर-शैक्षणिक अथवा दूसरे विभागों से जुड़े कार्यों में व्यस्त रहेंगे तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
अब शिक्षकों की मांग पर विभाग की नजर
मामले को लेकर अब शिक्षकों की ओर से यह मांग उठ रही है कि उन्हें अनावश्यक अतिरिक्त कार्यों से राहत दी जाए और उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी यानी शिक्षण कार्य पर फोकस कराया जाए। आने वाले समय में निपुण आकलन भी होना है, इसलिए शिक्षकों का कहना है कि इस अवधि में अतिरिक्त ड्यूटी कम किए जाने से विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है।

