● नंदन नीलेकणि ने पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का सुझाव दिया
● सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में बदलने की जरूरत भी बताई
नई दिल्ली, एजेंसी। इंफोसिस के सह-संस्थापक और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के संस्थापक चेयरमैन रह चुके नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को पेपर लीक रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का सुझाव दिया है।
नीलेकणि ने कहा कि प्रश्नपत्र परीक्षा के दिन ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए सवालों का एक बड़ा बैंक बनाया जाए और परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले उसी से प्रश्नपत्र तैयार हो। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उन्होंने सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में बदलने की जरूरत भी बताई। इसके लिए देशभर में परीक्षा केंद्रों का बड़ा नेटवर्क चाहिए। फिलहाल करीब 1.50 लाख स्थानों पर युवा परीक्षा दे सकते हैं। इस नेटवर्क को और बढ़ाने की जरूरत है।
उनके मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने की व्यवस्था व परीक्षा कराने के तरीके-दोनों में तकनीकी बदलाव जरूरी हैं। इससे पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी के जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा मौजूदा व्यवस्था में पहले से तैयार प्रश्नपत्र की बिक्री से आर्थिक फायदा जुड़ा होता है। इसलिए पेपर लीक का जोखिम बना रहता है। नीलेकणि परीक्षा सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय कार्यबल के प्रमुख हैं। मई में नीट-यूजी का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद चिकित्सा प्रवेश परीक्षा रद्द कर दी गई और फिर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस कार्यक्रम में कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये के मूल्य में बाहरी कारकों के चलते काफी गिरावट आई है और घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए आरबीआई अपने प्रयास जारी रखेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया निचले स्तर पर पहुंच गया है।
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