14 October 2026

पत्नी का गुजारा भत्ता नहीं रोक सकते : हाईकोर्ट

प्रयागराज, । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने के आदेश के खिलाफ पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। यह मामला कानपुर के पारिवारिक न्यायालय से जुड़ा था, जिसने 19 मार्च 2025 को पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश पारित किया था।


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हाईकोर्ट ने कहा कि किसी तीसरे व्यक्ति पर व्यभिचार का आरोप लगाकर, उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना उसके चरित्र और प्रतिष्ठा के खिलाफ निष्कर्ष दर्ज नहीं किया जा सकता। केवल तस्वीरों और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के आधार पर व्यभिचार साबित नहीं होता, जब तक उनकी प्रामाणिकता और विश्वसनीयता स्थापित न हो।


मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ला ने कहा कि पति ने कथित संबंध में जिस व्यक्ति का नाम लिया, उसे सुनवाई के लिए बुलाने का कोई प्रयास नहीं किया। ऐसे में उसके खिलाफ आरोप पर विचार करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगा।


अदालत ने अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में तस्वीरें और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री स्वीकार करने की मांग भी ठुकरा दी।


हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता देने के पारिवारिक न्यायालय के 19 मार्च 2025 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पति की ओर से ऐसा कोई कानूनी आधार नहीं दिखाया गया, जिससे आदेश रद्द किया जा सके।


हालांकि, कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कमी की ओर ध्यान दिलाया। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ते के मामलों में कथित व्यभिचारी व्यक्ति को पक्षकार बनाने या उसे नोटिस देने की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं है। इस संबंध में नियम बनाने अथवा मौजूदा नियमों को आवश्यक बदलाव के साथ लागू करने पर विचार के लिए हाईकोर्ट के महानिबंधक को मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया।