21 October 2026

स्कूलों में अब छात्र सीखेंगे कचरा प्रबंधन, गीले-सूखे कचरे के लिए अलग डस्टबिन

 

Schools News: अब स्कूलों में छात्र सीखेंगे कचरा प्रबंधन का पाठ, गीले-सूखे कचरे के निस्तारण की मिलेगी जानकारी

अमरोहा: स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। विद्यार्थियों को गीले और सूखे कचरे की पहचान करने, उन्हें अलग-अलग रखने और उनके सही निस्तारण के तरीके सिखाए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों में स्वच्छता की आदत विकसित करने के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा करना है।

गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन

जिला विद्यालय निरीक्षक शतानंद शर्मा के अनुसार, जिले के राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन मान्यता प्राप्त तथा सीबीएसई से संबद्ध हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में कचरा प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि गीले कचरे के लिए हरे, सूखे कचरे के लिए नीले, सैनिटरी कचरे के लिए लाल और विशेष देखभाल वाले कचरे के लिए काले रंग के डस्टबिन निर्धारित किए गए हैं। इसके माध्यम से बच्चे भोजन के बचे हुए पदार्थ, कागज और प्लास्टिक जैसी वस्तुओं को अलग-अलग रखना सीखेंगे।

कचरा प्रबंधन नियम-2026 के पालन पर जोर

रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेजों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे विद्यार्थियों की दैनिक आदतों में शामिल करने पर जोर दिया जाएगा।

विद्यार्थियों को स्कूल के साथ-साथ घरों में भी परिवार के सदस्यों को कचरे के उचित निस्तारण के लिए प्रेरित करने की सीख दी जाएगी। इससे स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी विकसित करने में मदद मिलेगी।

बड़े संस्थानों के लिए निर्धारित किए गए मानक

रिपोर्ट में बताया गया है कि 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली इमारतों तथा निर्धारित मात्रा में पानी की खपत करने वाले संस्थानों को नियमों के अनुसार कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करनी होगी। प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों पर भी संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं।

इन मानकों का उद्देश्य कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करना है।

पोर्टल पर देनी होगी निस्तारण की जानकारी

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पात्र स्कूल-कॉलेजों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल https://swm-cpcb.gov.in पर पंजीकरण कराना होगा। कचरे का निस्तारण नगर निकाय या अधिकृत संस्था के माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाना है। संबंधित संस्थानों को अनुपालन संबंधी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।

निष्कर्ष: स्कूलों में कचरा प्रबंधन की शिक्षा से विद्यार्थियों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, डस्टबिन के रंगों और संस्थानों पर लागू नियमों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों से की जानी चाहिए।