21 October 2026

Mid-Day Meal: शिक्षकों की जेब से चल रहा बच्चों का मिड-डे मील

 

Mid-Day Meal: शिक्षकों की जेब से चल रहा बच्चों का मिड-डे मील, 12 हजार स्कूलों में करीब 70 करोड़ रुपये की पोषण राशि बकाया

चंडीगढ़: हरियाणा के करीब 12 हजार सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में मिड-डे मील योजना के भुगतान में देरी का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर तक केंद्र के हिस्से की राशि जारी नहीं होने के कारण करीब 70 करोड़ रुपये की पोषण राशि बकाया है। भुगतान में छह महीने की देरी से कई स्कूलों में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

छह महीने से भुगतान अटका, शिक्षक परेशान

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान नहीं होने के कारण कई स्कूलों में शिक्षक अपनी जेब से खर्च करके मिड-डे मील की व्यवस्था चला रहे हैं। कुछ शिक्षक उधार लेकर बच्चों के भोजन का इंतजाम करने को मजबूर हैं।

स्कूलों में दाल, मसाले, तेल, सोया चूरा और आटे जैसी खाद्य सामग्री के साथ सब्जियां, गैस, दूध, दही और गुड़ भी खरीदा जाता है। ऐसे में समय पर राशि नहीं मिलने से स्कूलों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है।


स्पर्श पोर्टल की नई व्यवस्था में फंसा भुगतान

रिपोर्ट में बताया गया है कि भुगतान की नई व्यवस्था के तहत स्पर्श पोर्टल सिस्टम लागू होने के बाद राशि अटक गई है। नई व्यवस्था में अप्रैल से केंद्र के हिस्से की राशि नहीं आने की बात कही गई है।

स्कूलों को उम्मीद है कि पोर्टल के माध्यम से बिल जमा करने और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान जारी हो सकेगा। हालांकि, बकाया राशि जारी होने की निश्चित तारीख की जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

हर महीने भोजन पर होता है बड़ा खर्च

मिड-डे मील योजना के तहत खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी खर्चों पर हर महीने बड़ी राशि खर्च होती है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 12 हजार स्कूलों में योजना के संचालन पर करीब 10 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च होते हैं।

भुगतान में देरी के कारण स्कूलों के लिए भोजन की नियमित व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए जरूरी सामग्री समय पर खरीदना आवश्यक है।

जल्द भुगतान की उम्मीद

स्कूलों को उम्मीद है कि लंबित बिलों का सत्यापन पूरा होने के बाद बकाया राशि जारी की जाएगी। समय पर भुगतान होने से स्कूलों को उधार और निजी धन से भोजन की व्यवस्था करने की समस्या से राहत मिल सकती है।

निष्कर्ष: मिड-डे मील योजना में भुगतान की देरी का सीधा असर स्कूलों की दैनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए बकाया राशि का समय पर भुगतान जरूरी है।