बरेली, जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 2.83 लाख से अधिक नौनिहालों के स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने के लिए शासन स्तर से एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मिड-डे मील (एमडीएम) के तहत बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में मोटे अनाज यानी मिलेट्स को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। आदेश मिलते ही विभाग ने जिले भर के स्कूलों में तैयारियां तेज होगी।
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नई व्यवस्था का सीधा लाभ जिले के बेसिक स्कूलों में अध्ययनरत 2.83 लाख से अधिक बच्चों को मिलेगा। पूर्व में हुए मिलेट्स महोत्सव में बच्चों के खानपान में सुधार और उन्हें पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने पर गहन मंथन किया गया था। इसी महोत्सव में लिए ऐतिहासिक निर्णय के बाद शासन ने मिड-डे मील के मेनू में संशोधन करते हुए मिलेट्स को शामिल करने के आधिकारिक आदेश जारी किए थे। बीएसए डॉ. विनीता ने बताया कि नए आदेश के तहत अब प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रतिदिन का एक नया और संतुलित मेनू तैयार किया जाएगा। स्कूली बच्चों को सप्ताह में तीन दिन भोजन में मोटा अनाज दिया जाएगा। इसमें बाजरे की खिचड़ी के साथ-साथ सोयाबीन और अन्य मिलेट्स से बने स्वादिष्ट व पौष्टिक व्यंजन शामिल रहेंगे।
बदलेगा स्वाद, शरीर होगा पौष्टिक
बीएसए डॉ. विनीता ने बताया कि बच्चों के स्वाद और पसंद को ध्यान में रखते हुए रसोईया स्तर पर अलग-अलग तरह के व्यंजन तैयार करने की योजना बनाई गई है। मिड-डे मील के लिए आवश्यक मोटे अनाज की खरीद पारदर्शी तरीके से स्थानीय बाजारों से की जाएगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों का मानना है कि बाजरा, ज्वार, रागी और मक्का जैसे मोटे अनाज बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। इन अनाजों में आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर और आवश्यक विटामिन्स की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। कुपोषण से निपटने और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाने में यह आहार बेहद कारगर सिद्ध होगा।
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