यूपी की मतदाता सूची में एक के बाद एक गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग सख्त हो गया है। राजनीतिक दलों व सोशल मीडिया के माध्यम से मिल रहीं गड़बड़ियों का निस्तारण करने और आगे पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। मंडलायुक्त व डीएम की भी जिम्मेदारी व जवाबदेही तय कर दी गई है। अब उन पर भी कार्रवाई होगी। कंप्यूटर सहायकों से मतदाता फॉर्म की फीडिंग कराने पर रोक लगा दी गई है। 10 अप्रैल को एसआईआर की सूची जारी होने के बाद अभी तक फीड किए गए मतदाता फॉर्मों की जांच की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा की ओर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) को लेकर सभी मंडलायुक्तों व डीएम को सख्त निर्देश दिए गए हैं। सीईओ ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और त्रुटियों की पुनरावृत्ति पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी मण्डलायुक्तों को रोल प्रेक्षक के रूप में सघन पर्यवेक्षण कर यह सुनिश्चित करना होगा कि गड़बड़ी न हो। गड़बड़ी पर संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी यानी डीएम की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। किसी भी कीमत पर एसएसआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियां नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कुछ जिला निर्वाचन अधिकारियों के समय से रिपोर्ट न भेजने पर नाराजगी जताई।
कहा, ईआरओ 10 अप्रैल से अभी तक विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करेंगे। सभी अधिकारियों को ईआरओ नेट की लॉगिन आईडी व पासवर्ड किसी से भी साझा न किए जाने की हिदायत दी गई। अधिकारियों से ईसीआईनेट में निजी मोबाइल नंबर भी जोड़ने को कहा गया जिससे बीएसएनएल का नेटवर्क न मिलने पर भी काम प्रभावित न हो।
अब बीएलओ ऐप से जमा करेंगे डिजिटल फॉर्म


