इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी-2026) के मास्टर सेट के दो विवादित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 36 व 37) को मूल्यांकन से बाहर करने और 148 प्रश्नों के आधार पर नए सिरे से अंक निर्धारित कर परिणाम संशोधित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने विजय सोनकर व तीन अन्य अभ्यर्थियों की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा गत तीन जुलाई को प्राथमिक स्तर की यूपीटीईटी-2026 परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद जारी अंतिम उत्तर कुंजी में आयोग ने मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 व 37 में दो-दो विकल्पों को सही मान लिया। आयोग ने मूल्यांकन के दौरान केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक दिए, जिन्होंने उन दो मान्य विकल्पों में से किसी एक को चुना था। Xअन्य विकल्प चुनने वाले अभ्यर्थियों को कोई अंक नहीं मिला। गत 26 अगस्त को घोषित परिणाम में सामान्य/ओबीसी कट-ऑफ (82 अंक) से मामूली अंतर (जैसे 80 से 81.39 अंक) से अनुत्तीर्ण रहने वाले अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचियों की ओर से दलील दी गई कि बहुविकल्पीय परीक्षा में किसी प्रश्न के दो उत्तर सही हैं तो वह प्रश्न त्रुटिपूर्ण माना जाना चाहिए और उसे पूरी तरह हटाया जाना चाहिए या सभी अभ्यर्थियों को समान लाभ मिलना चाहिए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार विकल्पों में से एक विकल्प चुनने वाली वस्तुनिष्ठ परीक्षा में यदि चयन संस्था स्वयं दो विकल्पों को सही मान लेती है तो वह प्रश्न अपनी मूल्यांकन क्षमता खो देता है। यह प्रश्न योग्य और अयोग्य अभ्यर्थी के बीच भेद करने में असमर्थ हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि चयन आयोग ने इसी प्रश्नपत्र के प्रश्न संख्या 38 को पहले ही मूल्यांकन से बाहर किया था। ऐसे में दो सही उत्तर वाले प्रश्नों के साथ अलग व्यवहार करने का कोई तार्किक आधार नहीं है। कोर्ट ने माना कि केवल उन अभ्यर्थियों को अंक देना जिन्होंने बाद में मान्य किए गए दो विकल्पों में से किसी एक को चुना था, कानूनी रूप से सही नहीं है। प्रश्न को हटाने से सभी अभ्यर्थियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित होता है। Xकोर्ट ने कहा कि मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर किया जाए। इन दो प्रश्नों के हटने के बाद प्रश्नपत्र को 148 प्रश्नों का माना जाएगा और निर्धारित प्रतिशत के अनुसार ही अर्हता अंक की गणना की जाए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के आधार पर इस संशोधन का लाभ सभी समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को निष्पक्ष रूप से दिया जाए। आयोग को निर्देश दिया गया है कि याचियों के अंकों की पुनः गणना करे और उनके परिणाम व स्कोरकार्ड को उसके अनुसार संशोधित करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश से प्राप्त पात्रता केवल यूपीटीईटी-2026 के संशोधित परिणाम और अहर्ता स्थिति तक सीमित रहेगी। यह स्वतः ही किसी भावी भर्ती प्रक्रिया में सीधे चयन या नियुक्ति का अधिकार नहीं देगी।

