प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टीईटी को लेकर दाखिल एक अपील पर सुनवाई करते हुए परीक्षा नियामक/आयोग से आगामी टीईटी परीक्षाओं का प्रस्तावित कार्यक्रम मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने आयोग को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को तय की गई है। अपीलार्थी के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने कोर्ट के समक्ष मुख्य रूप से तीन तर्क रखे। पहला यह कि याची एनसीटीई द्वारा टीईटी में शामिल होने के लिए निर्धारित सभी न्यूनतम योग्यताएं पूरी करता है।
टीईटी केवल एक अर्हकारी परीक्षा है और यह सीधे नियुक्ति का अधिकार नहीं देती इसलिए उसे परीक्षा में बैठने से वंचित नहीं किया जा सकता। दूसरा यह कि याची संविदा कर्मचारी है। उसने आरोप लगाया कि संविदा पर कार्यरत अन्य समान कर्मियों (जैसे विशेष शिक्षकों) को सेवा में मानकर अवसर दिया गया जबकि याची के साथ भेदभाव करते हुए उसे बाहर कर दिया गया। तीसरा हर्ष कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि समन्वय पीठ ने स्पष्ट किया था कि विशेष भर्ती अभियानों में भी पात्र अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव कर उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। Xआयोग की ओर से अधिवक्ता कूष्मांडेय शाही ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों का हवाला देते हुए बताया कि आयोग वर्ष में कम से कम एक और अधिमानतः दो टीईटी परीक्षाएं आयोजित करने के लिए बाध्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो से चार जुलाई 2026 के बीच एक परीक्षा पहले ही आयोजित की जा चुकी है, जिसके लिए अधिकांश मूल याचियों ने आवेदन ही नहीं किया था। साथ ही उन्होंने यह भी दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय अंतिम समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक है, जो अभी काफी दूर है और आयोग भविष्य में भी निर्धारित निर्देशों के अनुसार परीक्षाएं आयोजित करेगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि कोई भी अंतिम आदेश करने से पहले आयोग का रुख औपचारिक हलफनामे के जरिए रिकॉर्ड पर आना जरूरी है। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि वह हलफनामे में यह स्पष्ट करे कि Xवर्ष 2026 के लिए दूसरी टीईटी आयोजित करने की क्या योजना/प्रस्तावित कार्यक्रम है। Xसुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में अगले दो वर्षों के भीतर प्रस्तावित अन्य टीईटी परीक्षाओं का खाका क्या रहेगा।

