प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 2010 व उससे पहले भर्ती शिक्षकों के लिए मंगलवार को विशेष टीईटी का आयोजन किया गया। इसका पेपर इतना कठिन था कि इसे हल करने में शिक्षकों के पसीने छूट गए। शिक्षक संगठनों ने कड़े पेपर पर नाराजगी जताई है। संगठनों ने कहा है कि अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के मुकाबले पेपर अधिक कठिन था।
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि विशेष टीईटी की समीक्षा शासन स्तर से कराई जाए और फिर उस पर कोई उचित निर्णय लिया जाए। ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि अन्य विभागीय परीक्षाओं में कर्मचारियों की परिस्थिति के अनुसार पेपर बनाया जाता है। ऐसे ही पेपर विशेष टीईटी का भी बनाया जाना चाहिए था।
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उन्होंने कहा कि शिक्षक पेपर देने से नहीं भाग रहे लेकिन परीक्षा के नाम पर उनके भविष्य व सम्मान से खिलवाड़ न किया जाए। महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि शिक्षकों के लिए ऐसा पेपर तैयार किया जाए, ताकि उनकी वर्षों की नौकरी पर आंच न आए। इस विशेष टीईटी में 50 से 55 साल के शिक्षक शामिल हुए थे। गणित, पर्यावरण, बाल मनोविज्ञान व अंग्रेजी के सवाल काफी कठिन व उलझाऊ सवाल पूंछे गए वह ठीक नहीं है।
