स्कूल बार-बार बंद होने से छात्रों में सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही

 

कोरोना महामारी और प्रदूषण के चलते बार-बार स्कूल बंद होने से छात्रों के पढ़ने और सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही है। शिक्षकों के अनुसार नियमित कक्षाएं न होने से छात्र ठीक ढंग से नहीं पढ़ पा रहे हैं और न ही सवालों का जवाब दे पा रहे हैं। ऑनलाइन कक्षा को लेकर छात्र ज्यादा सक्रिय नहीं है।

बुनियाद कमजोर हो रही : राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ पश्चिमी जिला के सचिव संतराम ने बताया कि कोरोना और प्रदूषण के चलते बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। इससे बच्चों की बुनियाद कमजोर हो रही है। वास्तविक पढ़ाई आमने-सामने कक्षा में होती है। ऑनलाइन पढ़ाई में 10-15 फीसदी से ज्यादा छात्र सक्रिय नहीं होते हैं वहीं उनकी सीखने की ललक भी कम हो रही है। छात्र मानसिक रूप से तनाव का शिकार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों की कक्षा के हिसाब से फर्क पड़ता है। नगर निगम के स्कूलों में शिक्षक अभी छठी के बच्चों से नहीं जुड़ नहीं सकेंगे तो सीखेंगे कैसे। ऐसा ही फर्क नौवीं और दसवीं कक्षा के बीच में नजर आ रहा है। गणित के छात्र खुद को कमजोर समझ रहे हैं।

बुनियादी सवालों का भी नहीं दे पा रहे जवाब : नगर निगम शिक्षक संघ के संयोजक सतेंद्र नागर ने बताया कि पिछले वर्ष लॉकडाउन से पहले जो छात्र दूसरी कक्षा में पढ़ता था वह ऑनलाइन पढ़ाई करते हुए चौथी कक्षा में पहुंच गया है। लेकिन उसका बुनियादी स्तर दूसरी कक्षा वाला ही बना हुआ है। पढ़ने से लेकर सवालों को हल करने में छात्रों के बीच परेशानी देखने को मिल रही है। ऑनलाइन कक्षा के लिए काफी छात्रों के पास संसाधनों का अभाव है तो कुछ ऑनलाइन कक्षा में सवाल पूछने पर नेटवर्क न आने का बहाना बताने लगते हैं।

असर

● शिक्षकों के अनुसार छात्र पहले जितने अक्षर भी नहीं पढ़ पा रहे

● सीखने की ललक घटी, मानसिक तनाव का शिकार भी हो रहे

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