37 बार स्कूल में हुई चोरी लेकिन एफआईआर एक बार भी नही, पढ़ें पूरी ख़बर


मैनपुरी, अनियमितताओं से घिरे प्राथमिक विद्यालय उद्यान नगर में 37 बार चोरी हुई लेकिन एफआईआर की कार्रवाई एक बार भी पूरी नहीं हुई। कंपोजिट ग्रांट सहित जितनी धनराशि विद्यालय के सौंदर्यीकरण, निर्माण, बिजली, पानी, खेलकूद सामिग्री आदि के लिए आई, उन्हें फर्जी बिल बनाकर निकाल लिया गया। तैनात प्रधानाध्यापक को तो यह भी नहीं पता कि दीक्षा एप का प्रयोग कैसे किया जाए। 20 मिनट तक दीक्षा एप का प्रयोग करने की कोशिश तो की परंतु असफल ही रहे।


सोमवार को प्राथमिक विद्यालय पहुंचे बीईओ ने यहां की स्थिति देखी तो अचंभित हो गए। पंजीकृत 49 विद्यार्थियों के स्थान पर 8 विद्यार्थी ही मौजूद थे। जबकि 29 अप्रैल को सिर्फ 5 विद्यार्थी थे। शेष दिनों में औसतन 25 से 35 के बीच फर्जी उपस्थिति दर्ज की जाती है। यहां स्कूल चलो अभियान के दौरान कोई भी हाउस होल्ड सर्वे नहीं किया गया। यहां एक अभिलेख चोरी का रजिस्टर बनाया गया जिसमें 15 अगस्त 2006 से 26 जनवरी 2022 की अवधि तक 37 बार चोरी होने का तिथिवार विवरण दर्ज मिला। चोरी गए सामान का विवरण था लेकिन किसी भी चोरी की प्रॉपर एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। पहली चोरी 17 मार्च 2008 को, दूसरी बार 4 जुलाई 2020 को और तीसरी चोरी 8 दिसंबर 2021 को दर्शाई गई थी। प्रधानाध्यापक द्वारा 11 दिसंबर 2021 के बाद शिक्षक डायरी अपडेट ही नहीं की गई और जो अपडेट थी वह भी पूरी तरह गलत। कक्षा 3 की संस्कृत पाठ्य पुस्तक को प्रधानाध्यापक 20 मिनट की कोशिश के बाद भी दीक्षा एप से नहीं पढ़ा सके।

पहले चोरी हो गई, फिर सामान खरीदा

खेलकूद सामिग्री क्रय करने के लिए भेजी धनराशि को बैंक से प्रधानाध्यापक ने अपने नाम से आहरण कर सामिग्री का क्रय नहीं किया। सत्यापन के दौरान पुरानी सामिग्री दिखाकर सत्यापन कराने की कोशिश की गई। प्रधानाध्यापक ने 2020-21 की खेलकूद सामिग्री चोरी होने की बात कही। पंजिका में 22 जून 2020 को चोरी दिखाई गई जबकि गार्ड फाइल में लगे बिल के अनुसार सामिग्री 28 सितंबर 2020 को खरीदी गईं।

ब्लूटूथ स्पीकर, सबमर्सिबल नाम पर भी गबन

खातों में दो ब्लूटूथ स्पीकर क्रय के लिए 2 हजार रुपये भेजे गए परंतु यहां सिर्फ एक ही स्पीकर खरीदा गया। टीएलएम निर्माण सामिग्री का रुपया भी निकाल लिया और खर्च कर लिया। ध्यानकर्षण मॉड्यूल अलमारी में बंद थे, प्रधानाध्यापक ने न तो कभी इनका अध्ययन किया और न प्रयोग। यहां तक कि उन्हें इनकी जानकारी भी नहीं थी। सबमर्सिबल पंप की फिटिंग के नाम पर 10140 रुपये का व्यय दिखाकर धनराशि का गबन कर लिया गया।

मेरे द्वारा 18 बिंदुओं की एक रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। प्रधानाध्यापक द्वारा लाखों रुपयों का गबन किया गया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सुमित कुमार,बीईओ, मैनपुरी

एमडीएम के नाम भी खूब खाया पैसा

निरीक्षण में बीईओ को यहां भी घोटाला दिखा। एमडीएम में रोटी-सब्जी बनी थी लेकिन फल गायब थे। बीती 15 मार्च को निरीक्षण में एमडीएम 14 फरवरी से बंद मिला था, तब भी केवल 5 बच्चे मौजूद थे। जब एमडीएम न बनने का कारण पूछा तो प्रधानाध्यापक ने बताया कि सभी बर्तन, गैस सिलेंडर, चूल्हा आदि चोरी हो गए। 16 मार्च को उन्होंने कंपोजिट ग्रांट से बर्तन, गैस सिलेंडर, चूल्हा आदि खरीदने के निर्देश दिए लेकिन नहीं खरीदे गए। 29 अप्रैल को जब पुन: निरीक्षण किया तब भी एमडीएम बंद मिला। इसके बाद उन्होंने अपने पास से 5 हजार रुपये दिए और तत्काल बाजार से सामिग्री क्रय करवाई।

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