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17 July 2025

एनसीईआरटी की नई किताबों में भारतीय इतिहास की पुनर्व्याख्या: अब बताए जाएंगे अनदेखे पहलू

 

नई दिल्ली — भारत के शैक्षिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए, एनसीईआरटी ने अपनी नई इतिहास की पुस्तकों में 13वीं से 17वीं शताब्दी के कालखंड को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। इस बार की पाठ्यपुस्तकों में सिर्फ ऐतिहासिक घटनाओं का वर्णन ही नहीं, बल्कि उन घटनाओं की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक गहराई को भी सामने लाने का प्रयास किया गया है।



‘भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण’ नामक अध्याय से शुरुआत

एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित नई इतिहास की पुस्तकों में “भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण” नामक एक अध्याय जोड़ा गया है, जिसमें 13वीं शताब्दी से लेकर 17वीं शताब्दी तक की घटनाओं को विस्तार से समझाया गया है। इसमें दिल्ली सल्तनत की स्थापना और पतन, विजयनगर साम्राज्य का उत्कर्ष, मुगलों की शासन प्रणाली और सिखों के उदय जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।


एनसीईआरटी की नई किताबों में भारतीय इतिहास की पुनर्व्याख्या: अब बताए जाएंगे अनदेखे पहलू


औरंगज़ेब व बाबर की भूमिका पर नया दृष्टिकोण

नई पुस्तकों में औरंगज़ेब को सिर्फ एक सैन्य शासक के रूप में ही नहीं बल्कि एक ऐसी शख्सियत के रूप में दर्शाया गया है जिसने मंदिरों के प्रति नीति बनाते समय गहराई से विचार किया। वहीं बाबर को एक योद्धा और निर्माता दोनों के रूप में वर्णित किया गया है। यह विवरण इतिहास को एकतरफा न दिखाकर उसे बहुआयामी तरीके से देखने की कोशिश का हिस्सा है।


अकबर और धार्मिक सहिष्णुता पर विशेष फोकस

नई पाठ्यपुस्तकों में मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल को ‘धार्मिक समरसता और सहिष्णुता’ का युग बताया गया है। इसमें दर्शाया गया है कि कैसे अकबर ने विभिन्न धर्मों के बीच सौहार्द बनाने का प्रयास किया और ‘सुलह-ए-कुल’ जैसे सिद्धांत को आगे बढ़ाया।


भारतीय हरितक्रांतिकारियों का भी समावेश

इस बार की पुस्तकों में उन भारतीय हस्तियों को भी प्रमुखता दी गई है जिन्होंने 13वीं से 17वीं शताब्दी के दौरान सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास में अहम योगदान दिया था, लेकिन जिन्हें अब तक नजरअंदाज किया गया था। ऐसे व्यक्तित्वों को उजागर कर छात्रों को एक समग्र ऐतिहासिक दृष्टिकोण देने की कोशिश की गई है।


शिवाजी को ‘रणनीतिकार’ के रूप में मान्यता

पाठ्यपुस्तकों में मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज को एक कुशल रणनीतिकार के रूप में चित्रित किया गया है, न कि सिर्फ एक युद्ध वीर के रूप में। यह प्रस्तुति उन्हें आधुनिक सैन्य सोच के एक प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित करती है।

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