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29 November 2025

शिक्षा देने को 23 वर्ष से परीक्षा दे रहे शिक्षक

 

श्रावस्ती : इकौना क्षेत्र के चार हजार

आबादी वाले फत्तूपुर तनाजा में जब 2002 में प्राथमिक स्कूल खुला तो बच्चों की शिक्षा का रास्ता साफ हो गया, लेकिन असल परीक्षा तो यहां शिक्षकों को देनी पड़ी। गांव तक पहुंचने के लिए या तो 75 किमी सड़क मार्ग का रास्ता है या फिर दो किमी की यात्रा नदी में नाव से की जाए। इसके बाद दो किमी की यात्रा रेत भरे रास्ते की है। शुरुआत में तो कई शिक्षकों ने अपना स्थानांतरण करा लिया, लेकिन अब यहां तैनात शिक्षकों ने दृढ़ इच्छाशक्ति से स्कूल की तस्वीर बदल दी है।



फत्तूपुर तनाजा श्रावस्ती जिले की सीमा का अंतिम गांव है, जिसके बाद धोबहा गांव है, लेकिन बीच में राप्ती नदी है। सड़क से फत्तूपुर तनाजा पहुंचना है तो इकौना से बलरामपुर जिले के हरिहरगंज से होते हुए पहुंचा जा सकता है। यह दूरी लगभग 75 किमी पड़ेगी। इकौना से भिनगा होते होकर भी पहुंचा जाए तो यह दूरी 75 किमी पड़ती है। एंबुलेंस, दमकल समेत अन्य सरकारी वाहन सेवाओं का भी लाभ इस गांव के लोगों को बलरामपुर से मिलता है। मथुरा घाट पुल न होने से नाव का ही सहारा है। शिक्षामित्र दीनदयाल के सहारे संचालित हो रहे स्कूल को वर्ष 2012 में सुरेंद्र नाथ की बतौर प्रधान शिक्षक तैनाती हुई। वर्ष 2014 में प्रवीण कुमार व वर्ष 2016 में सहायक शिक्षक सीमा गुप्ता की तैनाती हुई। सभी शिक्षक नाव पर सवार होते हैं। बाइक भी नाव पर ही चढ़ा लेते हैं।


शिक्षकों की लगन का परिणाम है कि यहां नामांकित 240 बच्चों में 75 प्रतिशत तक छात्रों की उपस्थिति रहती है। श्रावस्ती के विधायक रामफेरन पांडेय ने बताया कि पुल निर्माण के लिए मुख्यमंत्री को प्रस्ताव दिया है। प्रधान शिक्षक सुरेंद्र नाथ ने बताया कि बरसात के मौसम में बाइक से लगभग 75 किमी सफर करना पड़ता है।

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