लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में दस वर्ष की संतोषजनक सेवा पर शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ देने का नियम है। शिक्षकों को यह लाभतुरंत मिल सके इसके लिए दिसंबर 2024 को शासन ने पांच ऑनलाइन मॉड्यूल जारी किए गए। किंतु अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते शिक्षक चयन वेतनमान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा है कि प्रदेश के 25 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐसे हैं जो चयन वेतनमान को लेकर लापरवाही बरत रहे है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 50 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो चयन वेतनमान का लाभ पाने से वंचित है। चयन वेतनमान हर शिक्षक का अधिकार है। ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हुए 1 साल होने को है लेकिन चयन वेतनमान देने में लापरवाही से शिक्षक काफी नाराज है। शिक्षकों से समयबद्ध काम तो लिया जाता है लेकिन जब अधिकार देने की बात आती है तो अधिकारी हीलाहवाली करते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे चुनाव हो या फिर कोरोना काल, शिक्षकों ने अपना शत प्रतिशत योगदान दिया है। उन्होंने मांग की कि यदि शिक्षकों को लाभ न मिलने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्यवाही होनी चाहिए। ब्यूरो
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