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14 January 2026

पत्नी को पति की आय का 25% तक भरण-पोषण का अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पत्नी को पति की कुल आय का 25 प्रतिशत तक भरण-पोषण भत्ता दिया जा सकता है। कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा गुजारा भत्ता बढ़ाए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने सुरेश चंद्र द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनाया। याचिका में शाहजहांपुर स्थित परिवार न्यायालय के 26 जुलाई 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

500 से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह

परिवार न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 127 के तहत पत्नी को मिलने वाले भरण-पोषण की राशि 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दी थी। इस आदेश के खिलाफ पति की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

पति ने जताई आर्थिक असमर्थता

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह एक मजदूर है और सीमित आय में कठिनाई से जीवन यापन करता है। यह भी कहा गया कि भरण-पोषण राशि पहले ही कई बार बढ़ाई जा चुकी है और बार-बार वृद्धि करना अनुचित है। साथ ही आरोप लगाया गया कि निचली अदालत ने सभी तथ्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया।


कोर्ट ने क्या कहा

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वर्तमान महंगाई को देखते हुए 3000 रुपये प्रतिमाह की राशि न तो अत्यधिक है और न ही पति की आय से बाहर है। हाईकोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि पत्नी के सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए यह राशि उचित है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भरण-पोषण तय करते समय पति की आय, जीवन स्तर और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

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