प्रयागराज। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (पीईटी) में न्यूनतम कटऑफ (न्यूनतम प्रतिशत) निर्धारित किए जाने की मांग को जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिलने लगा है। सांसदों और विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पीईटी में स्पष्ट कटऑफ मानक तय करने की आवश्यकता जताई है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान में पीईटी केवल एक क्वालिफाइंग परीक्षा बनकर रह गई है। यदि इसमें न्यूनतम कटऑफ तय की जाती है, तो योग्य अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षाओं में बैठने का बेहतर अवसर मिलेगा और चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व न्यायसंगत बनेगी।
विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि जैसे टीईटी और सीटीईटी परीक्षाओं में पहले से न्यूनतम कटऑफ की व्यवस्था है, उसी तर्ज पर पीईटी में भी स्पष्ट मानक तय किए जाने चाहिए। इससे परीक्षा कैलेंडर बेहतर तरीके से तैयार होगा और अभ्यर्थियों को बार-बार यात्रा और भीड़भाड़ की परेशानियों से राहत मिलेगी।
पत्र में यह भी कहा गया है कि पीईटी प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है, जिसमें लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। न्यूनतम कटऑफ तय होने से योग्य उम्मीदवारों का चयन सुगम होगा और भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित एवं निष्पक्ष बन सकेगी।
जनप्रतिनिधियों की इस मांग के बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकार और चयन बोर्ड इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर पीईटी व्यवस्था में आवश्यक सुधार कर सकते हैं।

