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11 January 2026

प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक की नियुक्ति को चुनौती

 

प्रयागराज। 31 दिसंबर को प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक बनाए गए डॉ. बीएल शर्मा की तैनाती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बाघम्बरी गद्दी के रहने वाले बृजेन्द्र कुमार मिश्र ने मनमानी तैनाती के खिलाफ जनहित याचिका की थी। हालांकि नौ जनवरी को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस अरुण कुमार ने इसे जनहित याचिका के स्थान पर नियमित याचिका के रूप में दाखिल करने की सलाह दी है।



याची के अधिवक्ता की सहमति पर पीआईएल को नियमित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश देने के साथ हाईकोर्ट ने उपयुक्त बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। उच्च शिक्षा निदेशक के पद पर तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने के मामले में प्रदेश सरकार के साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, डॉ. बीएल शर्मा के साथ ही उच्च शिक्षा के विशेष सचिव और संयुक्त सचिव को भी पार्टी बनाया गया है।


प्रवक्ता को दे दिया पीजी प्राचार्य का पद

प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशक का पद राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य के समकक्ष होता है। जबकि डॉ. बीएल शर्मा पीजी तो दूर स्नातक (यूजी) कॉलेज के भी प्राचार्य नहीं हैं। वह वर्तमान में प्रवक्ता के वेतनमान पर कार्यरत हैं। 31 दिसंबर को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज की सेवानिवृत्ति के दिन वरिष्ठता सूची के अनुसार क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ के पद पर कार्यरत डॉ. मोनिका सिंह की तैनाती तय मानी जा रही थी। डॉ. बीएल शर्मा को निदेशक का प्रभार देने का फरमान आ गया। डॉ. बीएल शर्मा उच्च शिक्षा निदेशालय में सहायक निदेशक पर 25 मई 2018 से कार्यरत हैं। उनसे वरिष्ठ डॉ. शशि कपूर संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात हैं लेकिन उनको भी प्रभार नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार शिक्षा निदेशालय से निदेशक पद पर तैनाती के लिए जिन पांच नामों की संस्तुति भेजी गई थी उनमें डॉ. बीएल शर्मा का नाम नहीं था क्योंकि वरिष्ठता सूची में दर्जनों शिक्षक ऊपर हैं। चर्चा है कि मंत्री का करीबी होने के कारण ही वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए डॉ. बीएल शर्मा को इतनी अहम जिम्मेदारी दी गई है।

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