बैंकिंग, निवेश, बीमा और पेंशन के अलग विवरण देखने के झंझट से मुक्ति मिलेगी
बचत-निवेश का हिसाब-किताब एक साथ देख पाना संभव होगा
जल्द ही बैंकिंग, निवेश, बीमा और पेंशन से जुड़ा आपका पूरा वित्तीय हिसाब-किताब एक ही मासिक स्टेटमेंट में नजर आ सकता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड और भारतीय रिजर्व बैंक समेत सभी बड़े वित्तीय नियामक इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।
इस पहल का मकसद निवेशकों और आम उपभोक्ताओं को उनकी पूरी वित्तीय स्थिति एक जगह समझने में मदद देना है। अभी स्थिति यह है कि किसी व्यक्ति को अपने बैंक खाते, म्यूचुअल फंड, शेयर, बीमा, पेंशन और लोन की जानकारी अलग-अलग स्टेटमेंट से जुटानी पड़ती है। नई व्यवस्था लागू होने पर यह झंझट खत्म हो सकता है।
वर्तमान में म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के निवेशकों को हर महीने समेकित खाता विवरण मिलता है। इसमें व्यक्ति के पैन नंबर के आधार पर म्यूचुअल फंड योजनाओं और डीमैट खाते में रखी गई प्रतिभूतियों की जानकारी एक साथ दी जाती है। इसके अलावा, इरडा के तहत आने वाली राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली की जानकारी भी अब इस समेकित स्टेटमेंट में शामिल की जा चुकी है। हालांकि, बैंक जमा, बीमा पॉलिसी, ईपीएफ और लोन से जुड़ी जानकारी अभी इससे बाहर है।
सेबी चेयरमैन ने की पुष्टि: सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि नियामक इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। उद्देश्य यह है कि निवेशक केवल एक वित्तीय विवरण खोलकर अपनी पूरी आर्थिक स्थिति देख सके। यह व्यवस्था अनिवार्य नहीं होगी, लेकिन निवेशक चाहें तो विभिन्न नियामकों से अपना डेटा साझा करने की स्वैच्छिक अनुमति दे सकते हैं।
लोन और देनदारियों की भी दिखेगी साफ तस्वीर
इस पहल का अगला कदम और भी अहम हो सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, भविष्य में इस समेकित स्टेटमेंट में बकाया लोन और देनदारियों को भी शामिल किया जा सकता है। यानी निवेश और बचत के साथ-साथ होम लोन, पर्सनल लोन या अन्य कर्ज की जानकारी भी एक ही जगह दिखेगी।
तकनीक से संभव होगा एकीकृत स्टेटमेंट
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, अगर सभी नियामक अपनी-अपनी विनियमित संस्थाओं के डेटाबेस को एपीआई के जरिए साझा करने पर सहमत हो जाते हैं, तो तकनीकी रूप से ऐसा समेकित स्टेटमेंट बनाना संभव है।
क्या बदलने जा रहा है?
सेबी ने आरबीआई और बीमा नियामक इरडा के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि इस समेकित खाता विवरण का दायरा बढ़ाया जा सके। प्रस्ताव है कि इसमें बैंक जमा, बीमा पॉलिसी, भविष्य निधि, बॉन्ड और छोटी बचत योजनाएं और अन्य निवेश साधनों की जानकारी भी जोड़ी जाए।
निवेशकों के लिए बड़ा कदम
जानकारों का कहना है कि फिलहाल निवेशक एनएसडीएल और सीडीएसएल के जरिए अपनी प्रतिभूतियों और एनपीएस की जानकारी देख सकते हैं, लेकिन बैंक, बीमा और ईपीएफ का डेटा इससे बाहर है।

