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21 February 2026

बोर्ड परीक्षा ड्यूटी में उलझे प्राथमिक शिक्षक, शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

 

बोर्ड परीक्षा में उलझे परिषदीय स्कूलों के शिक्षक!

कानपुर। उत्तर प्रदेश में चल रही बोर्ड परीक्षाओं के बीच परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। शिक्षक संगठनों ने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए कहा है कि इससे प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

शिक्षक नेताओं का कहना है कि परिषदीय शिक्षक पहले से ही जनगणना, चुनाव, सर्वेक्षण और सरकारी योजनाओं के संचालन जैसे कई गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं में उनकी ड्यूटी लगाने से प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होती है और बच्चों की शिक्षा बाधित होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्राथमिक स्तर की शिक्षा बच्चों के भविष्य की नींव होती है। यदि इसी स्तर पर शिक्षकों को शिक्षण कार्य से हटाकर अन्य जिम्मेदारियों में लगाया जाएगा तो शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आना स्वाभाविक है।

शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि बोर्ड परीक्षाओं के संचालन के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाए और प्राथमिक शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करना आवश्यक है।




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