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03 March 2026

पढ़ाई में पिछड़ने की वजह कहीं ‘कम सुनना’ तो नहीं: डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट

 बच्चे का पढ़ाई में पीछे रहने का एक कारण ‘कम सुनाई देना’भी हो सकता है। हाल ही में इस संबंध में जारी हुई विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।


‘कम्युनिटी से क्लासरूम तक’ अभियान के तहत इस विषय पर रोशनी डाली गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया भर में 5 से 19 साल के लगभग 9 करोड़ बच्चे और किशोर सुनने की क्षमता में कमी के साथ जी रहे हैं। इनमें से अधिकांश बच्चों की समस्या का समय पर पता ही नहीं चल पाता, जिससे वे कक्षाओं में पीछे छूट जाते हैं।


भविष्य पर बुरा असर : सुनने की क्षमता का सीधा संबंध बच्चे के बोलने, भाषा सीखने और सोचने-समझने की शक्ति से है। अगर बच्चा शिक्षक की बात को ठीक से सुन नहीं पाएगा, तो वह उसे समझ भी नहीं सकेगा। सुनने में दिक्कत के कारण बच्चे का मन पढ़ाई से हटने लगता है और उसके ग्रेड्स गिर जाते हैं। ऐसे बच्चे अक्सर दूसरे बच्चों से घुलने-मिलने में हिचकिचाते हैं और अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं। अगर बचपन में ही इस पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर नौकरी मिलने की संभावनाएं कम हो सकती हैं और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।


हो सकता है समाधान : बच्चों में होने वाली सुनने की कमी के 60 फीसदी से ज्यादा मामलों को रोका जा सकता है।


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