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03 March 2026

आरक्षित पद तय होने के बाद ही होंगी भर्तियां

 

उत्तर प्रदेश में भर्तियों में आरक्षितों को कम कोटा मिलने के विवाद को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी है। आरक्षित पदों की संख्या तय होने के बाद ही भर्तियां की जाएंगी।





विभागों को रिक्तियों का प्रस्ताव भेजने से पहले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस के पदों को स्पष्ट करना होगा। जरूरी हुआ तो इसके लिए आयोगों के साथ विभागों द्वारा बैठक भी की जाएगी, जिससे भर्तियों को लेकर कोई पेंच न फंसे।


उत्तर प्रदेश में हर साल हजारों की संख्या में भर्तियां हो रही हैं। राज्य सरकार ने भर्तियों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश विद्युत सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल बनाया गया है। सबसे अधिक भर्तियां लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग करता है। यूपी में पिछले कुछ भर्ती विज्ञापनों को लेकर आपत्तियां जताई गईं। इसमें कहा गया है कि कुल रिक्तियों में ओबीसी के लिए कम पद तय किए जा रहे हैं। इसके चलते सियासी दलों को विरोध का मौका भी मिल जाता है।


लेखपाल भर्ती में 27% ओबीसी निर्धारित

लेखपाल पदों की भर्ती में ओबीसी के लिए निर्धारित 27% आरक्षण में 1441 पद मिलने पर बड़ा बवाल हुआ था। सपा और अन्य दलों ने इसे आरक्षण में कटौती बता हमला किया था। विरोध के बाद पदों की संख्या बढ़ाई गई। शासन इसीलिए चाहता है कि भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले जाने से पहले पदों की गिनती पूरी तरह से कर ली जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि आरक्षण के मुताबिक पदों का बंटवारा किया गया है या नहीं।


शासन ने सभी भर्ती आयोगों को भेजे निर्देश

शासन की ओर से आयोगों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राज्य के अधीन सेवाओं में अनुमन्य ऊर्ध्वाधर यानी वर्टिकल और क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्थाओं का मानक के अनुरूप पालन किया जाए। उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम-2020 में दी गई व्यवस्था को पूरी तरह से पालन किया जाएगा।

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