100 परिषदीय विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक तैनात
हाईकोर्ट ने कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती पर दिया है जोर
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में कम से कम दो नियमित शिक्षकों की तैनाती का सुझाव दिया है। इसके बावजूद राजधानी में करीब 100 ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जहां केवल एक-एक शिक्षक ही कार्यरत हैं। इससे करीब पांच हजार बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। राजधानी के परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या और नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं दिख रहे हैं।
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नारायणपुर, यूपीएस नारायणपुर, गोदौली और रौतापुर समेत करीब 100 विद्यालयों में लंबे समय से केवल एक शिक्षक ही तैनात है। इनमें से भी कई शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दी जाती है, जिससे पढ़ाई और अधिक प्रभावित होती है।
गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगे ड्यूटी
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुधांशु मोहन का कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है, ऊपर से उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने विभाग से हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है।
1616 विद्यालयों के लिए 4800 शिक्षक
शिक्षकों के अनुसार राजधानी में करीब 1616 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें दो लाख से अधिक छात्र पंजीकृत हैं। इनके मुकाबले महज 4800 शिक्षक कार्यरत हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक विद्यालय में कम से कम चार शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए। शिक्षकों की कमी के चलते अभिभावक भी अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में भेजने से कतराने लगे हैं।
शिक्षकों की तैनाती पर शासन स्तर से लिया जाता है फैसला
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि शिक्षकों का स्थानांतरण, पुनर्नियोजन और नए पदों पर नियुक्ति का फैसला शासन स्तर पर लिया जाता है वहां से मिले निर्देशों का पालन किया जाएगा।

