बीएचयू में एससी प्रोफेसर के साथ मारपीट का मामला
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के समाजशास्त्र विभाग में एससी प्रोफेसर के साथ हुई मारपीट, अभद्रता और जातिसूचक अपमान के मामले में आरोपी प्रोफेसर व छात्रों को राहत देने से इंकार कर दिया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की पीठ ने आरोपियों की ओर से दायर मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली तीन अलग-अलग अपीलों को खारिज कर दिया। ट्रायल कोर्ट में मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।
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समाजशास्त्र विभाग के अनुसूचित जाति के सहायक प्रोफेसर ने जनवरी 2019 में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि जब वे कक्षा में पढ़ाने जा रहे थे, तब विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार जोशी के इशारे पर छात्र अनंत नारायण मिश्रा और 10-15 अन्य छात्रों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया। उन्हें बेरहमी से पीटा, जूतों की माला पहनाई और कक्षा से घसीटते हुए बाहर निकाला। उन्हें जातिसूचक शब्द कहे। पुलिस ने मामले में दो अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए थे, जिसमें प्रो. अरविंद कुमार जोशी सहित छात्र शुभम त्रिपाठी, अनंत नारायण सिंह उर्फ चंकी व अन्य को आरोपी बनाया गया था। इन सभी के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत समन आदेश जारी किया गया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
अपीलकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी थी कि शिकायतकर्ता प्रोफेसर का आचरण ठीक नहीं था। उनके खिलाफ छात्रों ने भी शिकायतें दर्ज कराई थीं। रंजिश में यह फर्जी केस बनाया गया। यह भी कहा कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जनजाति से संबंध नहीं रखते हैं। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि संज्ञान लेने और समन जारी करने के चरण में केवल यह देखा जाना चाहिए कि अपराध का आधार मौजूद है या नहीं। रंजिश या अन्य बातें बचाव का विषय हैं जिनका फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर ही संभव है।

