27 April 2026

सत्यापित डाटा के आधार पर ही हो शिक्षकों का स्थानांतरण : हाईकोर्ट

 प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में अतिरिक्त शिक्षकों की पुनर्तैनाती और तबादलों की प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों का स्थानांतरण केवल विश्वसनीय और भौतिक रूप से सत्यापित डाटा के आधार पर ही किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने चंदौली निवासी सौरभ कुमार सिंह व अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।

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अदालत ने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती का मुख्य आधार शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात होना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने डाटा की सत्यता पर गंभीर सवाल उठाए। कहा कि राज्य सरकार की ओर से यू-डायस पोर्टल से लिया गया डाटा त्रुटिपूर्ण और अविश्वसनीय है। इस पर कोर्ट ने कहा कि पोर्टल के डाटा को केवल सांकेतिक माना जाए। तबादला करने से पूर्व भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए।

हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिलास्तरीय समिति को इस सत्यापन कार्य की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रत्येक विद्यालय के प्रधानाध्यापक और संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को संयुक्त रूप से विद्यालय में स्वीकृत पदों, कार्यरत शिक्षकों की संख्या, उनके विषय और 30 अप्रैल 2026 तक की वास्तविक छात्र संख्या को प्रमाणित करना होगा। इस सत्यापित डाटा को संबंधित जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से अपलोड किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। प्रभावित शिक्षकों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का उचित अवसर मिल सके।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विद्यालयों में कम से कम दो शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है। इसके साथ ही, महिला शिक्षकों के हितों का ध्यान रखने को कहा है। यदि कोई महिला शिक्षक सरप्लस है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर उसी ब्लॉक या निकटतम ब्लॉक में तैनात किया जाए जो सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हो और उसके निवास स्थान के पास हो।