नई दिल्ली : कक्षा एक से आठ तक के छात्रों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट खुली अदालत में सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने पुनर्विचार याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली है और चीफ जस्टिस का आदेश लेकर 13 मई को केस लगाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश टीईटी की अनिवार्यता के आदेश से प्रभावित हो रहे शिक्षकों के लिए एक राहत की खबर है, क्योंकि खुली अदालत में सुनवाई होने से उनके वकील कोर्ट के समक्ष बहस कर पाएंगे और अपना पक्ष ज्यादा बेहतर तरीके से रख पाएंगे।
यह आदेश जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने दिया है। मालूम हो कि जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही एक सितंबर, 2025 को टीईटी की अनिवार्यता का फैसला दिया था। उस फैसले में कहा था कि कक्षा एक से आठ तक के छात्रों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए, जिनकी नौकरी पांच वर्ष से ज्यादा
शीर्ष अदालत ने पुनर्विचार याचिकाओं पर खुली अदालत में सुनवाई करने की अर्जी की स्वीकार
बची है, दो वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य है। जिनकी नौकरी पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें भी अगर प्रोन्नति पानी है तो टीईटी पास करना अनिवार्य है। हालांकि, जिनकी नौकरी पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें टीईटी से छूट दे दी गई थी। कोर्ट के इस आदेश से पूरे देश में प्राथमिक और जूनियर कक्षाओं को पढ़ाने वाले पुरानी नियुक्ति के शिक्षकों में हड़कंप मच गया था। इस आदेश का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर हो रहा है, जिनकी नियुक्ति आरटीई कानून लागू होने से पहले यानी 2010 से पहले हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ देशभर के विभिन्न शिक्षक संघों, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्य सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर रखी है। सुप्रीम कोर्ट के तय नियम के मुताबिक पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाने वाली पीठ ही चैंबर में सर्कुलेशन के जरिये सुनवाई करती है। वहां पक्षकारों के वकील नहीं होते। माननीय न्यायाधीश फाइलों को देखकर फैसला लेते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में पुनर्विचार याचिकाओं के साथ एक अर्जी दाखिल की जाती है, जिसमें पुनर्विचार याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई का अनुरोध किया जाता है। अगर कोर्ट को मामला पुनर्विचार का लगता है और खुली अदालत में सुनवाई की जरूरत दिखती है, तो कोर्ट पुनर्विचार याचिका को खुली अदालत में सुनवाई के लिए लगाने का आदेश देती है, जिसमें पक्षकारों के वकील पेश होकर दलीलें रखते हैं। इस मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर गत 28 अप्रैल को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने चैंबर में विचार किया और मामले को खुली अदालत में सुने जाने की अर्जी स्वीकार करते हुए चीफ जस्टिस का आदेश लेकर केस को 13 मई को दोपहर दो बजे लगाने का निर्देश दिया। मामले की खुली अदालत में सुनवाई पर संतोष जाहिर करते हुए आल इंडिया बीटीसी शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल यादव कहते हैं कि इससे शिक्षकों में उम्मीद जगी है उन्हें कोर्ट से जरूर न्याय मिलेगा।

