नई दिल्ली, । क्या आप भी रिमोट जॉब या घर बैठे मोटी कमाई वाले विज्ञापनों पर क्लिक करते हैं? हां, तो सावधान हो जाइए! साइबर ठगों ने अब पढ़े-लिखे पेशेवरों और टेक-विशेषज्ञों को शिकार बनाने के लिए बेहद शातिर तरीका खोज लिया है। अब वे आपको फाइल डाउनलोड करने को नहीं कहते, बल्कि आपके ही हाथों से कंप्यूटर हैक करवाते हैं।
हाल ही में एक टेक-विशेषज्ञ ने सोशल मीडिया पर आपबीती सुनाई कि कैसे वह साजिश का शिकार होते-होते बचे। दरअसल, ठगों ने एक नामी कंपनी की फर्जी डेटा एनालिस्ट की नौकरी की पोस्ट डाली थी। वेतन शानदार था। मगर असली खेल तब शुरू हुआ जब नियोक्ता ने लिंक भेज वेरिफिकेशन के लिए क्लाउडफ्लेयर चेक पूरा करने का कहा। यह सामान्य टूल है, जिसका उपयोग वेबसाइट यह जांचने के लिए करती है कि विजिटर इंसान है या नहीं।
संदिग्ध लगा : टेक-विशेषज्ञ ने बताया, इस पेज का व्यवहार अलग था। पहले विंडोज+आर, कंट्रोल+वी और फिर एंटर दबाने को कहा गया। ऐसा करने से खतरनाक कमांड क्लिपबोर्ड में कॉपी कर दी गई। वह आगे के निर्देशों का पालन करते तो बिना जानेे ही अपने कंप्यूटर पर खुद ही मैलवेयर चला देता। उन्होंने लोगों को सावधान करते हुए कहा, असली क्लाउडफ्लेयर चेक कभी किसी को कीबोर्ड शॉर्टकट दबाने या अपने कंप्यूटर पर कमांड चलाने के लिए नहीं कहता। ऐसा कोई भी निर्देश गलत इरादे का स्पष्ट संकेत है।
एक गलती के नुकसान हजार
● आप कमांड चला देते हैं तो कंप्यूटर में इंफोस्टीलर वायरस घुस जाता है।
● वायरस ब्राउज़र से पासवर्ड चुरा लेता है।
● आपके बैंक अकाउंट और क्रेडिट कार्ड की जानकारी लीक कर देता है
● आपके वेबकैम और फाइलों का एक्सेस हैकर्स को दे देता है।
खुद को इन तरकीबों के जरिए बचा सकते हैं
अजीब कमांड्स से बचें: कोई भी कंपनी इंटरव्यू के दौरान आपसे कीबोर्ड शॉर्टकट (जैसे विंडोज+आर) चलाने या सिस्टम सेटिंग्स बदलने को नहीं कहेगी।
प्लेटफॉर्म चेक करें: बातचीत अचानक व्हाट्सऐप या वीचैट जैसे पर्सनल एप्स पर शिफ्ट हों तो सतर्क हों।
भरोसेमंद वेरिफिकेशन की पहचान: असली क्लाउडफ्लेयर या गूगल वेरिफिकेशन सिर्फ एक टिक बॉक्स या तस्वीरों को पहचानने तक सीमित होते हैं, वे आपसे कमांड नहीं चलवाते।

