01 May 2026

जिनके लिए करते थे मजदूरी, अब उनकी पढ़ाई-लिखाई नहीं है मजबूरी

 



प्रयागराज। इस बार प्रयागराज मंडल के लिए मजदूर दिवस खास होगा। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को अब अपने बच्चों को पढ़ाने से लेकर उनकी शादी करने तक किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं रह गई है। सरकार की विभिन्न योजनाओं ने मजदूरों का जीवन बदल दिया है।


प्रदेश के 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालयों का संचालन शुरू होने के बाद 2026 की सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में अटल आवासीय विद्यालय के पहले बैच ने ही अपना परचम लहरा दिया। खास यह कि प्रयागराज मंडल सबसे आगे रहा और बेलहट कोरांव, प्रयागराज स्थित अटल आवासीय विद्यालय में दसवीं के छात्र और श्रमिक के बेटे हर्षित कुमार 95.8 फीसदी अंकों के साथ सभी मंडलों में शीर्ष पर रहे। उप श्रमायुक्त सुमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक मई को लखनऊ में फतेहपुर निवासी हर्षित और विद्यालय के प्रधानाचार्य गोपाल कृष्ण मिश्र को सम्मानित करेंगे। इसी विद्यालय के आदर्श को 94.22 फीसदी, श्लोक मौर्या को 92.22 फीसदी, सूर्य प्रकाश गुप्ता को 91.8 फीसदी, सूरज को 91.6 फीसदी और मोनिका को 90.6 फीसदी अंक मिले। हाईस्कूल के पहले बैच में श्रमिकों के 128 बच्चे थे और विद्यालय का परिणाम 100 फीसदी रहा।

वेतन में बढ़ोतरी से मिली बड़ी राहत

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत किए गए संशोधन के बाद प्रयागराज में कुशल श्रमिकों को अब न्यूनतम प्रतिमाह 16025 रुपये मजदूरी मिलेगी जबकि इससे पहले यह मजदूरी न्यूनतम 13940.37 रुपये थी। इस हिसाब से कुशल श्रमिकों के वेतन में न्यूनतम 2084.63 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, अर्द्ध कुशल श्रमिकों न्यूनतम 1861 रुपये व अकुशल श्रमिकों के वेतन में 1692.35 रुपये की वृद्धि गई है। प्रयागराज में 10 लाख से अधिक श्रमिकों को इसका लाभ मिलेगा।

आयुष्मान योजना से जुड़ेंगे प्लेटफॉर्म वर्कर्स

उप श्रमायुक्त ने बताया कि अब प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी आयुष्मान योजना से जोड़ा जाएगा ताकि उन्हें मुफ्त इलाज की सुविधा मिल सके। इनमें जोमैटो, स्विगी, ओला, ऊबर, ब्लिंकीट जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।

185 बेटियों के हाथ पीले

मिली 85-85 हजार की मदद

श्रम विभाग की ओर से प्रयागराज मंडल के तहत फतेहपुर जिले में 27 अप्रैल को सामूहिक विवाह का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की 185 बेटियों के हाथ पीले हुए। बेटियों के विवाह में उन्हें एक रुपया खर्च नहीं करना पड़ा और सरकारी योजना के तहत उन्हें 85-85 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया।