अवधारणात्मक और स्टेटमेंट आधारित प्रश्नों ने बढ़ाई चुनौती, UPSC प्रीलिम्स 2026 में बदला परीक्षा ट्रेंड
प्रयागराज। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा रविवार को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में इस बार प्रश्नों के स्वरूप ने अभ्यर्थियों को चौंका दिया। जिले के 79 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित परीक्षा में अवधारणात्मक, विश्लेषणात्मक और स्टेटमेंट आधारित प्रश्नों की अधिकता देखने को मिली, जिससे अभ्यर्थियों को काफी चुनौती का सामना करना पड़ा।
परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के अनुसार, इस बार केवल तथ्यों को याद रखने से सफलता मिलना मुश्किल था। प्रश्नों में विषयों की गहरी समझ, विश्लेषण क्षमता और समसामयिक घटनाओं से जुड़ाव की परीक्षा ली गई। सामान्य अध्ययन (GS) के प्रश्न लंबे, बहुस्तरीय और स्टेटमेंट आधारित रहे, जिसने कई परीक्षार्थियों को उलझन में डाल दिया।
जिले में 30 हजार से अधिक अभ्यर्थी हुए शामिल
प्रयागराज जिले में कुल 30,818 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। पहली पाली में करीब 69.75 प्रतिशत और दूसरी पाली में लगभग 69 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई। परीक्षार्थियों का कहना था कि परीक्षा का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक कठिन और विश्लेषणात्मक रहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, UPSC अब केवल रटने की क्षमता नहीं बल्कि अभ्यर्थियों की तार्किक सोच, विषयों के बीच संबंध स्थापित करने की क्षमता और समसामयिक मुद्दों की समझ को परख रहा है।
समसामयिक घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर फोकस
परीक्षा में समसामयिक घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़े प्रश्नों को विशेष महत्व दिया गया। इसमें संयुक्त राष्ट्र महासम्मेलन 2025, डीपफेक तकनीक, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन, समुद्री मार्ग और पर्यावरणीय मुद्दों जैसे विषय शामिल रहे।
इतिहास, कला एवं संस्कृति से भी लगभग 20 प्रश्न पूछे गए। वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था, राज्य व्यवस्था और विज्ञान-प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रश्नों ने अभ्यर्थियों की तैयारी का स्तर परखा।
CSAT पेपर अपेक्षाकृत सरल
विशेषज्ञों के अनुसार, CSAT का पेपर पिछले वर्ष की तुलना में अपेक्षाकृत सरल रहा। इसमें संचार कौशल और तार्किक क्षमता आधारित प्रश्न अधिक थे। हालांकि, सामान्य अध्ययन के पेपर ने अधिकांश अभ्यर्थियों की कठिन परीक्षा ली।
फेस ऑथेंटिकेशन व्यवस्था रही सफल
UPSC ने इस बार पहली बार परीक्षा केंद्रों पर रियल टाइम फेस ऑथेंटिकेशन व्यवस्था लागू की। आयोग के अनुसार, इसका उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखना और फर्जीवाड़े को रोकना था। परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही।
परीक्षा समाप्त होने के बाद केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों के चेहरे पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई छात्रों ने परीक्षा को “ट्रेंड बदलने वाली” बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में तैयारी की रणनीति भी बदलनी पड़ेगी।
