8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग अभी विभिन्न कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेने की प्रक्रिया में जुटा है। इसी बीच सबसे बड़ी कर्मचारी संस्था नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने सरकार के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो लागू होने पर लाखों कर्मचारियों की सैलरी और प्रमोशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह प्रस्ताव पे-लेवल (Pay Levels) को आपस में मर्ज यानी एंटीग्रेट करने का है। कर्मचारी संगठन का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई ऐसे पे-लेवल हैं, जिनमें वेतन का अंतर बहुत कम है, लेकिन कर्मचारियों के बीच पद और वेतन को लेकर बड़ा अंतर दिखाई देता है। इससे लंबे समय में असंतोष पैदा होता है और प्रमोशन की रफ्तार भी प्रभावित होती है।
दरअसल, 8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था और आयोग फिलहाल देशभर में कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें कर रहा है। आयोग 15 जून तक सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी कर चुका है, जबकि विभिन्न विभागों से आंकड़े जुटाने का काम जुलाई के अंत तक जारी रहेगा। इन बैठकों का उद्देश्य कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों को समझना और उसी आधार पर वेतन, भत्ते, पेंशन तथा वेतन संरचना में बदलाव की सिफारिश करना है। आयोग की सिफारिशों का फायदा करीब 1 करोड़ लोगों को मिलने की उम्मीद है।
वेतन संरचना में बड़े बदलाव की मांग
NC-JCM ने वेतन संरचना में बड़े बदलाव की मांग करते हुए कहा है कि मौजूदा पे मैट्रिक्स को सरल बनाया जाए। संगठन का कहना है कि लेवल-2 और लेवल-3, लेवल-4 और लेवल-5, लेवल-7 और लेवल-8 तथा लेवल-9 और लेवल-10 को एक-एक संयुक्त पे-स्केल में बदल दिया जाए। कर्मचारी संगठन का तर्क है कि इन लेवल के कर्मचारियों का काम लगभग समान होता है और वास्तविक वेतन में भी ज्यादा अंतर नहीं होता। इसके बावजूद अलग-अलग पे-लेवल होने से कर्मचारियों के बीच असमानता और निराशा की भावना पैदा होती है। अगर इन स्तरों को मिला दिया जाए, तो वेतन संरचना ज्यादा सरल, पारदर्शी और न्यायसंगत बन सकती है।
एक और महत्वपूर्ण डिमांड
संगठन ने एक और महत्वपूर्ण डिमांड रखते हुए कहा है कि मौजूदा लेवल-5 के कर्मचारियों को एक बार के खास प्रावधान के तहत सीधे लेवल-6 में अपग्रेड किया जाए। NC-JCM का कहना है कि केंद्रीय सचिवालय, रेलवे, डाक विभाग और रक्षा विभाग जैसे कई संस्थानों में बड़ी संख्या में ग्रुप-C कर्मचारी सालों से लेवल-5 में ही रुके हुए हैं। इस वजह से उन्हें प्रमोशन के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते और करियर ग्रोथ प्रभावित होती है। लेवल-6 में अपग्रेड करने से यह रुकावट काफी हद तक दूर हो सकती है।
इसके अलावा कर्मचारी संगठन ने न्यूनतम बेसिक वेतन ₹69,000 करने, मौजूदा 3% वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने, महंगाई से जुड़ा वेतन मॉडल लागू करने और नई वेतन संरचना के अनुरूप पेंशन व्यवस्था में भी बदलाव की डिमांड की है। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति बेहतर होगी और बढ़ती महंगाई का असर कम होगा।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी डिमांड अभी केवल कर्मचारी संगठनों के सुझाव हैं। अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। आयोग से फरवरी या अप्रैल 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट देने की उम्मीद है। इसके बाद सरकार अगर सिफारिशों को स्वीकार करती है, तो उन्हें लागू होने में दो से तीन साल तक का समय लग सकता है, यानी अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो नई वेतन संरचना का पूरा लाभ कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिल सकता है। फिलहाल, कर्मचारी संगठनों की इन डिमांड पर सभी की नजर बनी हुई है, क्योंकि इनका असर लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भविष्य पर पड़ सकता है।

