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24 July 2026

8वें वेतन आयोग में बेसिक सैलरी पर मिलेगा बड़ा तोहफा, अब तक का ये रहा पैटर्न

 

केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो वेतन आयोग अगले साल की पहली छमाही में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप सकता है। इसके बाद सरकार को तय करना है कि इसे किस तरीक से लागू करती है। वेतन आयोग की क्या सिफारिशें होंगी ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन इसमें सबसे बड़ा फैक्टर फिटमेंट फॉर्मूला का होने वाला है। दरअसल, फिटमेंट फॉर्मूला के आधार पर ही सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव होता रहा है। सैलरी पर कुल असर भत्तों, पे स्ट्रक्चर, महंगाई के हिसाब से बदलाव और इसे लागू करने पर सरकार के आखिरी फैसले पर भी निर्भर करता है।




चौथे वेतन आयोग से शुरुआत

हालांकि, वेतन आयोग ने अभी तक फिटमेंट फैक्टर पर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिए हैं लेकिन पिछले वेतन आयोगों का रिकॉर्ड यह बताता है कि हर बार कर्मचारियों के बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव हुआ है। 1986 में लागू किया गया चौथा वेतन आयोग सरकारी सैलरी को सही ढंग से व्यवस्थित करने की शुरुआती बड़ी कोशिशों में से एक था। इस आयोग की वजह से सैलरी में लगभग 27.6% की बढ़ोतरी हुई और कम से कम बेसिक सैलरी बढ़कर ₹750 हो गई। 1996 में लागू 5वें वेतन कमीशन ने सैलरी के स्ट्रक्चर में और बदलाव की सिफारिश की। कम से कम बेसिक पे को बदलकर ₹2550 कर दिया गया, जिससे सैलरी में लगभग 31% की बढ़ोतरी का अनुमान था।


 वहीं, साल 2006 में लागू 6ठवें वेतन आयोग ने पुराने सैलरी सिस्टम को हटाकर 'पे बैंड' और 'ग्रेड पे' का कॉन्सेप्ट लाकर एक बड़ा बदलाव किया। इसने 1.86 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की, जिसके नतीजे में कम से कम बेसिक सैलरी बढ़कर ₹7,000 हो गई।


 इसके बाद सातवां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ। इसमें पे-बैंड और ग्रेड पे की जगह पे मैट्रिक्स सिस्टम लागू किया गया। आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की, जिसके बाद न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गया।


आठवें वेतन आयोग से क्या उम्मीद?

आठवें वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर 3 या उससे अधिक रखा जाए। वहीं, कुछ अनुमानों के अनुसार यदि सरकार 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो लेवल-1 के कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 51,480 रुपये हो सकता है। हालांकि यह केवल अनुमान है और अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों तथा केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।

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