24 July 2026

टीईटी विशेष परीक्षा के आदेश के बाद भी अंबेडकरनगर में शिक्षकों की नाराजगी बरकरार



उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) कराने की तैयारी शुरू कर दी है, जिन्होंने अब तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं की है। शासन के इस फैसले का अंबेडकरनगर में गैर-टीईटी शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई थी, जब टीईटी अनिवार्य नहीं थी, इसलिए वर्षों बाद इस शर्त को लागू करना न्यायसंगत नहीं है। जिले से गैर-टीईटी शिक्षकों का पूरा ब्योरा पहले ही शासन को भेजा जा चुका है। यह जानकारी गूगल फॉर्म के माध्यम से संकलित की गई थी। बीएसए डॉ. पूनम मिश्रा ने बताया कि हाल में आयोजित टीईटी परीक्षा से पहले जिले में प्राथमिक विद्यालयों में 4,134 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1,707 शिक्षक कार्यरत थे। इनमें 2,088 शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं की है। इन सभी का विवरण शासन को उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई टीईटी परीक्षा का परिणाम आने के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि इनमें से कितने शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। शिक्षक जितेंद्र कुमार पटेल ने कहा कि टीईटी का नियम जबरन थोपा जा रहा है। हम करीब 20 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। वर्ष 2004 से पहले तत्कालीन नियमावली के तहत नियुक्त शिक्षकों पर अब टीईटी की अनिवार्यता लागू करना प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के विपरीत है। अशोक कुमार यादव ने कहा कि 52 वर्ष की उम्र में टीईटी परीक्षा देना हमारे लिए कठिन है। केंद्र सरकार को अध्यादेश लाकर सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देनी चाहिए और उनके लंबे शैक्षणिक अनुभव को ही पात्रता का आधार माना जाना चाहिए।