लखनऊ, । हर साल सत्र शुरू होने पर अधिकारी बच्चों को मुफ्त किताबें मुहैया कराने का दावा करते हैं लेकिन माध्यमिक स्कूलों में हकीकत इसके उलट है। नया शैक्षिक सत्र शुरू हुए 111 दिन बीत चुके हैं, फिर भी यूपी बोर्ड के सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के बस्ते अब भी खाली हैं। सरकारी किताबें न मिलने से हजारों बच्चों की पढ़ाई पर संकट गहरा गया है। किताबें उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है।
प्रधानाध्यापकों की शिकायत पर डीआईओएस ने प्रधानाचार्यों से एक निर्धारित प्रारूप में नामांकित बच्चों के सापेक्ष प्राप्त और अप्राप्त किताबों का ब्योरा मांगा है। नवयुग कन्या विद्यालीय इंटर कॉलेज,खुन खुन जी गर्ल्स इंटर कॉलेज,कृष्णा देवी इंटर कॉलेज समेत कई स्कूलों में आधी किताबें मिली हैं।
माध्यमिक और प्राइमरी स्कूलों में एक अप्रैल को नया सत्र शुरू हुआ था। जुलाई की 20 तारीख बीत गई है, लेकिन सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों किताबें व कार्य पुस्तिका नहीं मिली है। सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का कहना है कि किताबों की कई बार मांग भेजी लेकिन मिली नहीं।
स्कूलों को किताबें एवं कार्य पुस्तिकाएं न मिलने से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ है। इन स्कूलों में गरीब परिवार के ही बच्चे पढ़ने आते हैं। जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि सत्र के आरंभ में ही किताबें स्कूलों को मुहैया करा दें।
सोहनलाल वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष,

