26 August 2026

15 से 29 आयुवर्ग के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई कर रहे, न रोजगार में

 

15 से 29 आयुवर्ग के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ाई कर रहे, न रोजगार में

नई दिल्ली। भारत के सामने युवाओं को शिक्षा से रोजगार की ओर ले जाने की बड़ी चुनौती सामने आई है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं और न ही रोजगार में हैं। इनमें प्रशिक्षण से दूर युवाओं की संख्या भी बड़ी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन युवाओं को एनईईटी (न तो शिक्षा, न रोजगार और न प्रशिक्षण) श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, यह आंकड़ा 2021 के नेशनल सैंपल सर्वे के 7.8 प्रतिशत के आंकड़े पर आधारित है और मौजूदा 2026 की स्थिति इससे अलग हो सकती है।

घरेलू जिम्मेदारियों में बड़ी संख्या में युवा

रिपोर्ट के अनुसार, एनईईटी श्रेणी में शामिल युवाओं में बड़ी संख्या घरेलू जिम्मेदारियों में लगी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक 88 प्रतिशत युवा घरेलू जिम्मेदारियों में संलग्न हैं। वहीं 8.25 प्रतिशत स्नातक अपनी योग्यता से मेल खाने वाले रोजगार से जुड़े हैं।

नीति आयोग ने 'रीइमेजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047' रिपोर्ट में कहा है कि देश के स्किलिंग मॉडल को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय रोजगार, कमाई और करियर में आगे बढ़ने से जोड़ना होगा।

2025-26 में कौशल विकास के लिए 34 हजार करोड़ का बजट

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में युवाओं के कौशल विकास के लिए करीब 34,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया। वहीं, 2021 के नेशनल सैंपल सर्वे के आधार पर 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को वर्ष 2014-15 से अब तक प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

नीति आयोग ने युवाओं के लिए प्रशिक्षण विकल्पों को अधिक लचीला बनाने और जरूरत के मुताबिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। साथ ही शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत संपर्क बनाने पर जोर दिया गया है।

स्कूल स्तर से कौशल विकास पर जोर

नीति आयोग ने स्कूल स्तर से ही रोजगारपरक और उद्यमिता कौशल विकसित करने का सुझाव दिया है। इसके तहत कक्षा छह से 12 तक जनरल एम्प्लॉयबिलिटी एंड एंटरप्रेन्योरियल स्किल्स (जीईईएस) शुरू करने और कक्षा नौ से चुनिंदा स्कूलों में 'वोकेशनल ट्रैक' विकसित करने का प्रस्ताव है।

रिपोर्ट में स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी, परियोजना आधारित सीखने और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है। कॉलेज स्तर पर अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप और काम के साथ सीखने के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।