26 August 2026

किराए के घर में रहते हैं तो ऐसे बचा सकते हैं टैक्स, HRA क्लेम के नए नियम जानना जरूरी

किराए के घर में रहते हैं तो ऐसे बचा सकते हैं टैक्स, HRA क्लेम के नए नियम जानना जरूरी

HRA Tax Saving Rules 2026: किराए के मकान में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में HRA से जुड़ा एक अहम बदलाव हुआ है। अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी HRA की 50 फीसदी वाली श्रेणी में शामिल किया गया है। हालांकि HRA का टैक्स लाभ केवल पुराने टैक्स रिजीम में ही उपलब्ध है। साथ ही, किराए का दावा करते समय मकान मालिक और किराए के भुगतान से जुड़ी जानकारी का रिकॉर्ड रखना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। (cleartax)


नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू होने के साथ वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए HRA यानी House Rent Allowance को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। अगर आप किराए के घर में रहते हैं और आपकी सैलरी में HRA मिलता है, तो सही तरीके से इसका दावा करके अपनी टैक्स देनदारी कम कर सकते हैं।

लेकिन अब केवल किराए की रसीद संभालकर रखना ही पर्याप्त मानकर नहीं चलना चाहिए। नए नियमों के तहत HRA क्लेम से जुड़ी जानकारी और दस्तावेजों पर अधिक ध्यान देना होगा।

सबसे पहले समझिए—HRA का लाभ किसे मिलता है?

HRA का टैक्स लाभ मुख्य रूप से उन सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को मिलता है, जिन्हें उनके नियोक्ता की ओर से वेतन में House Rent Allowance दिया जाता है और जो वास्तव में किराए के मकान में रहते हैं।

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि HRA exemption नए टैक्स रिजीम में उपलब्ध नहीं है। यह लाभ पुराने टैक्स रिजीम के तहत ही लिया जा सकता है। इसलिए केवल किराए का भुगतान करने से नए रिजीम में HRA टैक्स फ्री नहीं हो जाता। (Income Tax Department)

2026-27 में चार नए शहरों को 50% HRA श्रेणी का लाभ

वित्त वर्ष 2026-27 से HRA की गणना के लिए 50 फीसदी की सीमा वाली शहरों की सूची का विस्तार किया गया है।

अब इस श्रेणी में कुल 8 शहर हैं:

  • दिल्ली

  • मुंबई

  • कोलकाता

  • चेन्नई

  • बेंगलुरु

  • हैदराबाद

  • पुणे

  • अहमदाबाद

पहले 50 फीसदी की सीमा केवल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के लिए थी। 1 अप्रैल 2026 से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी इस सूची में शामिल किया गया है। (cleartax)

ध्यान दें: इसका मतलब यह नहीं है कि इन शहरों में रहने वाले हर कर्मचारी को अपनी सैलरी का 50 फीसदी HRA exemption मिल जाएगा। 50 फीसदी केवल गणना की अधिकतम सीमा में से एक है।

HRA की छूट कैसे तय होती है?

पुराने टैक्स रिजीम में HRA exemption की रकम तीन आंकड़ों में से सबसे कम होती है:

  1. नियोक्ता से मिला वास्तविक HRA

  2. वास्तविक किराया – बेसिक सैलरी और संबंधित DA का 10%

  3. मेट्रो श्रेणी में बेसिक सैलरी + संबंधित DA का 50% या अन्य शहरों में 40%

CBDT की ITR validation rules भी इसी गणना को दर्शाती हैं। (Income Tax Department)

आसान उदाहरण

मान लीजिए किसी कर्मचारी की सालाना बेसिक सैलरी और पात्र DA ₹6 लाख है और उसे साल में ₹2 लाख HRA मिलता है।

वह सालाना ₹2.40 लाख किराया देता है।

तो:

  • वास्तविक HRA = ₹2 लाख

  • किराया – बेसिक/DA का 10% = ₹2.40 लाख – ₹60,000 = ₹1.80 लाख

  • 50% सीमा = ₹3 लाख

इन तीनों में सबसे कम रकम ₹1.80 लाख है। इसलिए पात्र HRA exemption ₹1.80 लाख तक हो सकती है, बशर्ते अन्य शर्तें पूरी हों।

सिर्फ रेंट रिसीट से काम नहीं चलेगा

HRA क्लेम करते समय वास्तविक किराया भुगतान का प्रमाण रखना समझदारी है। इसके लिए बैंक ट्रांसफर, UPI, नेट बैंकिंग या अन्य डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकता है।

अगर भुगतान नकद किया गया है, तो वास्तविक भुगतान साबित करना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। इसलिए जहां संभव हो, बैंकिंग चैनल के जरिए किराया भुगतान करना बेहतर है।

साथ ही, रेंट एग्रीमेंट और किराए की रसीदें भी संभालकर रखनी चाहिए।

अब मकान मालिक की जानकारी भी महत्वपूर्ण

Income Tax Rules, 2026 के तहत कर्मचारी द्वारा नियोक्ता को दिए जाने वाले दावों के नए Form 124 में HRA के लिए मकान मालिक का नाम, पता, PAN/Aadhaar संबंधी जानकारी, कर्मचारी और मकान मालिक के बीच संबंध तथा भुगतान किए गए किराए की जानकारी के लिए जगह दी गई है। (Income Tax Department)

इसका मतलब है कि HRA क्लेम में मकान मालिक की पहचान और उसके साथ संबंध को लेकर जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज की जा सकती है।

खास तौर पर अगर आप अपने माता-पिता या किसी रिश्तेदार को किराया देते हैं, तो इस संबंध को छिपाने के बजाय सही जानकारी देना जरूरी है।

माता-पिता को किराया देते हैं तो क्या करें?

कई कर्मचारी टैक्स प्लानिंग के तहत अपने माता-पिता के घर में रहते हैं और उन्हें किराया देते हैं। ऐसी व्यवस्था वास्तविक और वैध हो सकती है, लेकिन इसे केवल कागजों पर दिखाना उचित नहीं है।

अगर आप वास्तव में माता-पिता को किराया दे रहे हैं, तो:

  • वास्तविक किराया भुगतान करें।

  • बैंक/UPI से भुगतान का रिकॉर्ड रखें।

  • उचित रेंट एग्रीमेंट रखें।

  • रेंट रिसीट सुरक्षित रखें।

  • माता-पिता के स्तर पर किराए की आय की सही टैक्स रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें।

  • HRA क्लेम में संबंध की सही जानकारी दें।

₹50 हजार से ज्यादा मासिक किराए पर TDS का नियम

एक अलग महत्वपूर्ण नियम उन मामलों में लागू होता है जहां किराए की रकम ₹50,000 प्रति माह से अधिक है।

ऐसे मामलों में Individual/HUF tenant पर लागू TDS प्रावधानों को ध्यान में रखना जरूरी है। वित्त वर्ष 2026-27 से पुराने Income-tax Act, 1961 की जगह Income-tax Act, 2025 और उसके तहत बनाए गए नियम लागू हैं। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 के बाद होने वाले संबंधित लेनदेन के लिए नया Form 141 इस्तेमाल किया जाता है। (Income Tax Department)

इसलिए अधिक किराया देने वाले किरायेदारों को HRA exemption के साथ-साथ TDS compliance पर भी ध्यान देना चाहिए।

PAN नहीं है तो क्या होगा?

मकान मालिक की PAN संबंधी जानकारी भी महत्वपूर्ण है। आयकर विभाग के पोर्टल पर किराए से संबंधित TDS प्रक्रिया में landlord की PAN और अन्य जानकारी मांगी जाती है। PAN उपलब्ध न होने की स्थिति में लागू प्रावधानों के अनुसार अधिक TDS दर जैसी स्थिति बन सकती है। (Income Tax Department)

इसलिए बड़े किराए के मामलों में मकान मालिक की PAN जानकारी पहले से लेना बेहतर है।

फर्जी HRA क्लेम करने पर भारी नुकसान

HRA में गलत जानकारी देकर टैक्स कम करने की कोशिश महंगी पड़ सकती है। यदि किसी दावे को कर विभाग misreporting of income की श्रेणी में मानता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत भारी penalty लग सकती है। इसलिए “रसीद बनवा लेने” या बिना वास्तविक किराया दिए HRA लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

खास तौर पर ऐसा दावा जिसमें किराया वास्तव में दिया ही नहीं गया हो या जानबूझकर गलत जानकारी दी गई हो, गंभीर कर अनुपालन समस्या बन सकता है।

HRA क्लेम करने वालों के लिए जरूरी दस्तावेज

किराए के मकान में रहने वाले कर्मचारियों को ये रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना चाहिए:

1. Rent Agreement
मकान मालिक और किरायेदार के बीच वैध किराया समझौता रखें।

2. Rent Receipts
नियमित किराया भुगतान की रसीदें सुरक्षित रखें।

3. Bank/UPI Statement
किराए के भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड रखें।

4. Landlord Details
मकान मालिक का नाम, पता और लागू होने पर PAN आदि की जानकारी रखें।

5. Relationship Details
अगर मकान मालिक माता-पिता या कोई रिश्तेदार है, तो संबंध की सही जानकारी दें।

6. Salary Documents
Form 16, salary slips और HRA से संबंधित विवरण भी सुरक्षित रखें।

नया रिजीम चुनने से पहले HRA जरूर देखें

आज के समय में टैक्सपेयर्स के सामने Old Tax Regime और New Tax Regime दोनों विकल्प हैं। अगर किसी कर्मचारी को HRA का अच्छा लाभ मिल रहा है, तो पुराने रिजीम में मिलने वाली HRA exemption को भी अपनी कुल टैक्स देनदारी की गणना में शामिल करना चाहिए।

दूसरी ओर, अगर नए रिजीम में कुल टैक्स कम बन रहा है तो केवल HRA के कारण पुराने रिजीम का चुनाव करना जरूरी नहीं है।

यानी फैसला केवल HRA देखकर नहीं, बल्कि पूरे साल की आय, HRA, अन्य deductions और दोनों regimes में बनने वाले कुल टैक्स की तुलना करके करना चाहिए।

अगर HRA नहीं मिलता तो भी टैक्स राहत का रास्ता है

हर किराएदार को HRA नहीं मिलता। ऐसे मामलों में पात्र व्यक्ति Section 80GG के तहत किराए के भुगतान पर deduction के लिए पात्र हो सकता है, बशर्ते संबंधित शर्तें पूरी हों। आयकर विभाग के अनुसार 80GG के लिए Form 10BA से जुड़ी compliance भी आवश्यक है। (Income Tax Department)

इसलिए जिन कर्मचारियों की salary structure में HRA नहीं है, उन्हें 80GG की eligibility भी जांचनी चाहिए।

HRA क्लेम करते समय ये गलतियां न करें

इन गलतियों से बचें:

❌ बिना किराया दिए HRA क्लेम न करें।
❌ केवल कागजी rent receipt पर निर्भर न रहें।
❌ नकद भुगतान का अस्पष्ट रिकॉर्ड न रखें।
❌ मकान मालिक की जानकारी गलत न दें।
❌ माता-पिता/रिश्तेदार को किराया देने पर संबंध छिपाएं नहीं।
❌ ₹50,000 से अधिक मासिक किराए के मामलों में TDS नियमों को नजरअंदाज न करें।
❌ नए टैक्स रिजीम में HRA exemption मानकर गणना न करें।

निष्कर्ष

किराए के घर में रहने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए HRA आज भी टैक्स बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन सही नियमों और वास्तविक लेनदेन के साथ इसका इस्तेमाल करना जरूरी है।

वित्त वर्ष 2026-27 से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को 50 फीसदी HRA सीमा वाली सूची में शामिल किए जाने से पुराने टैक्स रिजीम का विकल्प चुनने वाले पात्र कर्मचारियों को फायदा मिल सकता है। (Cewacor)

साथ ही, नए Form 124 में landlord की जानकारी और कर्मचारी-मकान मालिक के संबंध जैसी जानकारियां शामिल होने से documentation को लेकर लापरवाही करना सही नहीं होगा। (Income Tax Department)

सबसे जरूरी बात: HRA क्लेम तभी करें जब किराया वास्तव में दिया गया हो और उसके पर्याप्त दस्तावेज आपके पास मौजूद हों। टैक्स बचाने के चक्कर में गलत या फर्जी दावा करने के बजाय नियमों के अनुसार सही दस्तावेज तैयार रखना ज्यादा सुरक्षित है।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। आपकी आय, सैलरी स्ट्रक्चर और टैक्स रिजीम के अनुसार HRA का वास्तविक लाभ अलग हो सकता है। अंतिम टैक्स गणना के लिए आयकर विभाग के वर्तमान नियमों या योग्य टैक्स प्रोफेशनल की सलाह लें।