सार्वजनिक अवकाश पर जॉइनिंग नहीं करने वाले शिक्षकों को भी पहली वार्षिक वेतन वृद्धि का हक: हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक अवकाश के कारण जॉइनिंग नहीं कर पाने वाले शिक्षक पहली वार्षिक वेतन वृद्धि समेत अन्य सेवा लाभों से वंचित नहीं किए जा सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि वार्षिक वेतन वृद्धि की पात्रता तय करने के लिए वास्तविक जॉइनिंग की तारीख को ही अंतिम और निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता।
मामला वर्ष 2016 में नियुक्त सहायक अध्यापकों की पहली वार्षिक वेतन वृद्धि से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 28 जून 2016 को हुई थी, लेकिन दो जुलाई 2016 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण वे उस दिन कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके। विभाग ने उनकी जॉइनिंग एक जुलाई के बजाय बाद की तारीख में मानी और पहली वेतन वृद्धि एक जुलाई 2017 से निर्धारित की थी।
शिक्षकों का दावा था कि उन्हें पहली वेतन वृद्धि एक जनवरी 2017 से मिलनी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने शासनादेश और विभागीय स्पष्टीकरण का हवाला दिया।
कोर्ट ने विभाग को दिया निर्णय लेने का निर्देश
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने मामले में पीलीभीत समेत विभिन्न जिलों से जुड़ी 17 याचिकाओं को साथ जोड़कर सुनवाई की। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग को वर्ष 2016 में दो जुलाई को पदभार ग्रहण करने वाले शिक्षकों की पहली वार्षिक वेतन वृद्धि के लाभ पर छह सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग केवल इस आधार पर पहली वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ नहीं रोक सकता कि शिक्षकों ने एक जुलाई के बजाय दो जुलाई को कार्यभार ग्रहण किया था, जबकि एक जुलाई को सार्वजनिक अवकाश था।
हजारों शिक्षकों के मामले पर असर
यह मामला करीब 15 हजार शिक्षकों की भर्ती के दौरान नियुक्त सहायक अध्यापकों की वेतन वृद्धि से जुड़ी विसंगति से संबंधित है। शिक्षकों का कहना था कि विभागीय आदेश जारी होने के बावजूद उन्हें वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया।
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक अवकाश के दिन जॉइनिंग संभव नहीं होने की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विभाग को तार्किक निर्णय लेना चाहिए। हाईकोर्ट के निर्देश से ऐसे शिक्षकों को पहली वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ मिलने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

