बाराबंकी के 24 विद्यालयों में शिक्षक संकट, 527 छात्रों की पढ़ाई एक-एक शिक्षक के भरोसे
बाराबंकी। जिले के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। स्कूलों में भवन और छात्र तो मौजूद हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। जिले के 24 परिषदीय विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। वहीं, मर्जर के बाद दो प्राथमिक विद्यालय बंद हैं और दो पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
162 विद्यालयों में 419 शिक्षक तैनात
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 162 परिषदीय विद्यालयों में 419 शिक्षकों की तैनाती है। प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक और जूनियर विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है। कई विद्यालयों में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं के बच्चों को संभालना पड़ रहा है।
10 जूनियर स्कूलों में एक शिक्षक पर 527 छात्र
जिले के 10 जूनियर विद्यालयों में कक्षा 6, 7 और 8 के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ एक-एक शिक्षक पर है। इन विद्यालयों में करीब 527 छात्र अध्ययनरत हैं।
कोटवा और कोटवाधाम की स्थिति और भी गंभीर बताई गई है। कोटवा में शिक्षक की कमी को देखते हुए इमिलिहा के शिक्षक दिनेश मौर्या को संबद्ध कर विद्यालय का संचालन कराया जा रहा है। वहीं कोटवाधाम में 68 छात्र हैं, जहां प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
कमोली में 105 छात्र, दनापुर क्यामपुर में 71, पहरूपुर में 70 और अद्रा में 71 छात्र हैं, लेकिन इन विद्यालयों में एक-एक शिक्षक ही तैनात है।
16 प्राथमिक विद्यालय भी शिक्षक संकट में
प्राथमिक स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। 16 प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक व्यवस्था प्रभावित है। इनमें 14 विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
मर्जर के बाद दो विद्यालयों में बाल वाटिका संचालन का दावा किया गया है, लेकिन शमसुद्दीनपुर स्थित विद्यालय में ताला लगा रहने की बात सामने आई है। इन दोनों विद्यालयों में एक भी शिक्षक तैनात नहीं है।
प्राथमिक विद्यालय मुजेहना में संजय बाजपेई की एकल शिक्षक के रूप में तैनाती है, लेकिन वह निंदूरा में एआरपी के रूप में कार्यरत बताए गए हैं।
सवाल—बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी?
एक तरफ परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या और शैक्षिक गतिविधियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक न होने से पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। एक शिक्षक पर कई कक्षाओं और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की जिम्मेदारी होने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना होगा कि शिक्षकों की कमी से जूझ रहे इन विद्यालयों में विभाग की ओर से कब तक पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था की जाती है।

