● सेवानिवृत्त होते गए शिक्षक, लंबे समय से भर्ती ही नहीं हुई
● स्कूलों में शिक्षकों के 2000 पद सृजित, आधे खाली चल रहे हैं
लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के आधीन संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों के आधे से अधिक पद लंबे समय से रिक्त हैं। शिक्षक सेवा नियमावली जैसी तमाम विसंगतियां होने के नाते नई भर्ती नहीं हो पायी। पहले भर्ती शिक्षक सेवानिवृत्त होते गए और मौजूदा समय में एक हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। अंशकालिक (अतिथि) शिक्षक के भरोसे पढ़ाई व्यवस्था संचालित की जा रही है। माना जा रहा है शिक्षक सेवा नियमावली जारी होने के बाद रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
प्रदेश में इस वक्त 103 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय विद्यालय संचालित हैं। आश्रम पद्धति व्यवस्था होने के नाते बच्चों के रहने खाने से लेकर कॉपी किताब तक का खर्च राज्य सरकार उठाती है। कुल विद्यालयों में से 59 स्कूल सीबीएसई बोर्ड तथा 44 स्कूल यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम पर संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में करीब 2000 शिक्षकों के पद सृजित हैं। मौजूदा समय में शिक्षकों के एक हजार से ज्यादा पद रिक्त हैं।
सर्वोदय विद्यालय में शिक्षकों की भर्ती लोक सेवा आयोग से होती है। लंबे समय से विभाग द्वारा रिक्त पदों के सापेक्ष अधियाचन भी आयोग को नहीं भेजा गया। लिहाजा भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। वजह बताई जा रही है कि विभाग के पास शिक्षक सेवा नियमावली न होने के कारण नई भर्तियां नहीं हो पायी। शिक्षक सेवा नियमावली पर ध्यान तब गया जब वर्ष 2024 में विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक हुई। फिलहाल 13 वरिष्ठ प्रवक्ता को सीधे प्रधानाचार्य के ग्रेड पे 7600 पर पदोन्नति हो गई तो विभाग चौकन्ना हुआ। इसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
सीएम ने दिए खाली पदों को भरने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक बुलाई तो इसमें शिक्षकों की कमी का भी मुद्दा उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप अन्य आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित हो। शासन ने समाज कल्याण निदेशालय से शिक्षकों के रिक्त पदों तथा पढ़ाई की मौजूदा व्यवस्था की रिपोर्ट तलब की। तब पता चला कि 1000 से ज्यादा पद रिक्त हैं। रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है लेकिन पिछले वर्ष तैनात रहे अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल न बढ़ाने से पढ़ाई प्रभावित है।

