प्रयागराज। प्रदेश के 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड की अर्हता का विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा। बीएड के 107 पदों पर भर्ती के लिए चार साल पहले 2022 को आवेदन लेने के बाद इस मामले में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के निर्देशों के बावजूद उच्च शिक्षा विभाग के अफसर और विषय विशेषज्ञ अब तक चयन के लिए अर्हता तय नहीं कर सके हैं। इस बीच असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड के 107 पदों पर भर्ती के लिए तीन बार विज्ञापन जारी हो चुका है और दो बार परीक्षा तिथि टाली जा चुकी है।
एक अभ्यर्थी अंजू ने अर्हता को लेकर हाईकोर्ट में याचिका की है जिस पर 12 अगस्त को सुनवाई होनी है। कोर्ट ने माना है कि फाउंडेशन कोर्स और पेडागॉजिक (शिक्षाशास्त्रीय) कोर्स के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यताओं को एक साथ प्रकाशित किए जाने से अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों में फाउंडेशन और पेडागॉजिक कोर्स के लिए योग्यताएं अलग-अलग निर्धारित हैं। एनसीटीई के अनुसार फाउंडेशन कोर्स के लिए सामाजिक विज्ञान में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ परास्नातक और 55 प्रतिशत अंकों के साथ एमएड अथवा शिक्षा में एमए तथा बीएड/बीएलएड की योग्यता निर्धारित है। वहीं पेडागॉजिक कोर्स के लिए विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान या भाषाओं में 55 प्रतिशत अंकों के साथ परास्नातक और 55 प्रतिशत अंकों के साथ एमएड की योग्यता बताई गई है।
याचिका में कहा गया कि 28 अप्रैल 2026 को जारी विज्ञापन में पेडागॉजिक कोर्स के लिए संबंधित विषय में परास्नातक के साथ एमएड की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से अलग नहीं किया गया है। इस कारण यह भ्रम पैदा हो रहा है कि पेडागॉजी के लिए एमएड की जगह एमए इन एजुकेशन मान्य है। इस संबंध में पहले भी समन्वय पीठ और विशेष अपील पीठ के स्तर पर निर्णय हो चुका है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाकर पुष्ट हो चुका है।

