28 September 2026

सिर्फ स्थानांतरण के लिए 132 शिक्षक बन गए दिव्यांग, प्रमाणपत्रों की जांच में खुला मामला

 


सिद्धार्थनगर। शिक्षक स्थानांतरण में दिव्यांगता की वरीयता हासिल करने के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों द्वारा दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने का मामला सामने आया है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 174 शिक्षकों ने दिव्यांगता के आधार पर स्थानांतरण की वरीयता मांगी थी, जिनमें से 132 शिक्षकों ने पहली बार दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया।


नियुक्ति के समय नहीं लगाया था दिव्यांग प्रमाणपत्र


रिपोर्ट के मुताबिक, इन शिक्षकों ने नियुक्ति के समय दिव्यांगता प्रमाणपत्र नहीं लगाया था। स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने के बाद दिव्यांगता के आधार पर वरीयता पाने के लिए आवेदन किया गया। मामला सामने आने के बाद प्रमाणपत्रों की जांच शुरू की गई।


इन 174 शिक्षकों में 42 ऐसे शिक्षक भी बताए गए हैं, जिन्होंने नियुक्ति के समय ही अपना दिव्यांगता प्रमाणपत्र लगाया था।


135 प्रमाणपत्रों की जांच


इसी बीच ईएनटी विभाग में श्रवण संबंधी दिव्यांगता की जांच भी कराई गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच के लिए पहुंचे लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में प्रतिदिन औसतन 2 से 3 लोगों की सुनने की क्षमता की जांच होती है, लेकिन स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान जांच कराने वालों की संख्या बढ़ गई।


दिव्यांग बोर्ड कार्यालय की ओर से जून में कुल 197 दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में है। इनमें अप्रैल में 84 और मई में 72 प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।


दिल्ली पुलिस भी कर रही जांच


मामले में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच दिल्ली पुलिस द्वारा भी किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने ईएनटी विभाग में श्रवण संबंधी दिव्यांगता की जांच कराने आए मामलों के संबंध में पूछताछ की है।


साथ ही सीएमओ कार्यालय का दिव्यांग बोर्ड भी प्रमाणपत्रों की जांच के लिए आवेदन दिल्ली रेफर करता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र मामले में एक वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक की गिरफ्तारी भी हो चुकी है और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।


स्थानांतरण में दिव्यांगता के आधार पर वरीयता


रिपोर्ट के अनुसार, स्थानांतरण में दिव्यांगता के आधार पर वरीयता मांगने वाले 174 शिक्षकों में 82 ने बच्चों, 43 ने पत्नी और 49 ने स्वयं के दिव्यांग होने के आधार पर आवेदन किया था।