वाराणसी, संवाददाता। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) नितिन पांडेय की अदालत ने 12 वर्षीय बच्ची के साथ यौवन शोषण करने के मामले में ईश्वरगंगी निवासी शिक्षक मुकेश श्रीवास्तव को बुधवार को बीस साल की सजा सुनाई है। वहीं, तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। साथ ही कोर्ट ने दोषी पर एक लाख 53 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने 80 प्रतिशत हिस्सा बतास क्षतिपूर्ति पीड़िता को देने का आदेश दिया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से नौ गवाह पेश किए। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष केअनुसार पीड़िता की मां ने जैतपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि पुत्री कोचिंग करने के लिए शिक्षक मुकेश श्रीवास्तव के घर ईश्वरगंगी स्टार होम स्कूल के पास जाती थी। कोर्स कम्प्लीट कराने के लिए 22 सितंबर 2024 को धोखे से पुत्री को शिक्षक ने बुलाया था। आरोपी ने उसके साथ यौवन शोषण करने का प्रयास किया। इस बीच पीडि़ता वहां भागकर घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना बताई।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दोषसिद्ध मुकेश श्रीवास्तव ने गुरु शब्द की महिमा को ही खंडित करने का प्रयास किया है। जब गुरु को इतनी बड़ी हस्ती के रूप में समाज में देखा जाये तो गुरु का भी यह कर्त्तव्य है कि वह अपने शिष्य अथवा शिष्या के लिए उचित मापदण्ड समाज में पेश करे। दोषसिद्ध मुकेश श्रीवास्तव ने ऐसा मापदंड स्थापित किया, जो निश्चित रूप से समाज में एक गलत संदेश देगा।
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