29 September 2026

कॉलेज आवंटन के बाद नियुक्ति के लिए पहुंचे तो पता चला पद खाली नहीं

 

कॉलेज आवंटन के बाद नियुक्ति के लिए पहुंचे तो पता चला पद खाली नहीं


अभ्यर्थियों की शिकायत पर शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शिक्षा निदेशक को भेजा पत्र



| प्रयागराज

चार साल बाद पीजीटी (प्रवक्ता संवर्ग) अभ्यर्थियों को नौकरी तो मिली, पर वह आवंटित कॉलेज में नियुक्ति नहीं पा रहे हैं。 जिस कॉलेज के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने उनका चयन किया, वहां गए तो बताया गया कि पद ही नहीं हैं。 ऐसे कई अभ्यर्थी नौकरी पाने के बाद अभिलेख लेकर शिक्षा निदेशालय और चयन आयोग के अफसरों के यहां गुहार लगा रहे हैं。 चयनितों का कहना है कि इसमें उनका क्या गुनाह है, जो नौकरी मिलने के बाद भी नियुक्ति नहीं पा रहे हैं。 शिकायत आने पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने इस संबंध में शिक्षा निदेशक, माध्यमिक को पत्र लिखा है。 आयोग की नियमावली-2023 के अनुसार इसके लिए संबंधित उत्तरदायी के खिलाफ कार्रवाई भी होगी。


प्रवक्ता संवर्ग के लिए 624 पदों के लिए चयन आयोग की ओर से वर्ष 2022 में विज्ञापन जारी किया गया था。 चार वर्ष बाद 28 जुलाई 2026 को चयनित अभ्यर्थियों को कॉलेज भी आवंटित कर दिया गया。 भदोही की उर्वशी यादव 2022 पीजीटी परीक्षा की प्रदेश टॉपर हैं。 उनका चयन वाराणसी के एक कॉलेज में हुआ था。 वह नियुक्ति के लिए कॉलेज पहुंचीं तो बताया गया कि यहां पर पदोन्नति कर पद भर गया है。 इसी तरह प्रयागराज की सौम्या सिंह का चयन हिंदी विषय के लिए हुआ है。 वह लखनऊ में 22 सितंबर को आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में शामिल हुई थीं, जहां मुख्यमंत्री अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे。 सौम्या का चयन बुलंदशहर के एक कॉलेज के लिए हुआ है。 24 सितंबर को जब वह कॉलेज में नियुक्ति के लिए पहुंचीं तो वहां प्राचार्य की ओर से बताया गया कि प्रवक्ता इतिहास के पद पर एक वर्ष पहले ही दूसरी शिक्षिका को पदोन्नति के माध्यम से नियुक्त कर दिया गया है。

समायोजन की प्रक्रिया तक करना होगा इंतजार

  • आयोग का रुख: आयोग के उप सचिव संजय सिंह का कहना है कि अध्याचिता पद पर पदोन्नति या नियुक्ति पहले ही कैसे कर ली गई, इसके लिए शिक्षा निदेशक, माध्यमिक को पत्र लिखा गया है。 जो चयनित अभ्यर्थी कार्यभार ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं, इस संबंध में स्पष्ट आख्या संबंधित जिलों के अधिकारियों से मांगी गई है。 साथ ही संबंधित अभ्यर्थियों को समायोजित किए जाने के लिए रिक्त पदों का अधियाचन आयोग को उपलब्ध कराया जाए, ताकि चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराया जा सके。

  • निदेशालय का पक्ष: अपर शिक्षा निदेशक, माध्यमिक कामता राम पाल का कहना है कि इस तरह के कई मामले आ रहे हैं。 जिला विद्यालय निरीक्षक के जरिये यह पता किया जाएगा किन कारणों से नियुक्ति नहीं दी जा रही है。