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02 November 2026

साक्षात्कार के बीच हाईकोर्ट पहुंचा अर्हता का विवाद

 प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में प्राचार्य के 111 पदों पर भर्ती के लिए साक्षात्कार के बीच अर्हता का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सरकारी और एडेड महाविद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही प्राइवेट कॉलेज के शिक्षकों से भी प्राचार्य भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। चयन आयोग ने लिखित परीक्षा में सफल 50 से अधिक प्राइवेट कॉलेज के शिक्षकों को 27 अक्तूबर से चल रही साक्षात्कार प्रक्रिया में विभिन्न कारणों से शामिल करने से इनकार कर दिया।
चयन आयोग का कहना है कि यूजीसी मानकों को पूरा करने वाले प्राइवेट कॉलेज के शिक्षकों से ही आवेदन मांगे थे। इसमें नियुक्ति, चयन, वेतनमान से लेकर पदोन्नति आदि की पूरी प्रक्रिया यूजीसी के अनुरूप होनी चाहिए थी। केवल उन्हीं शिक्षकों को साक्षात्कार में शामिल होने से रोका है जिनके अभिलेख यूजीसी मानकों के अनुरूप नहीं थे। सूत्रों के अनुसार निजी महाविद्यालयों के 16 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका की है जिसकी सुनवाई सोमवार को होनी है। इस बीच साक्षात्कार शनिवार को पूरे हो गए और चयन आयोग एक-दो दिन में ही अंतिम परिणाम घोषित करने की तैयारी में है। आयोग ने पात्रता के कॉलम में पीएचडी की उपाधि, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और उच्चतर शिक्षा की अन्य संस्थाओं में कम से कम 15 वर्षों के शिक्षण /अनुसंधान की सेवा/ अनुभव के साथ कोई आचार्य/सह आचार्य को अर्ह माना था। पिछली भर्ती में भी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग ने निजी कॉलेज के शिक्षकों से आवेदन तो लिए थे लेकिन साक्षात्कार प्रक्रिया के दौरान सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

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