प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) में शिक्षामित्रों को शामिल करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमित पदों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों और शिक्षामित्रों की सेवा की प्रकृति एवं परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में दोनों संवर्गों के बीच अंतर के आधार पर विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल न करना भेदभाव नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि शिक्षामित्रों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसलिए उन्हें विशेष टीईटी में शामिल न किए जाने को अनुचित नहीं कहा जा सकता।
31 अगस्त 2028 तक छह नियमित टीईटी कराने का आदेश
इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया है कि 31 अगस्त 2028 तक कम से कम छह नियमित शिक्षक पात्रता परीक्षाएं (TET) आयोजित कराई जाएं। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वसीम अहमद की विशेष अपील पर दिया।
अगली नियमित टीईटी फरवरी 2027 में प्रस्तावित
आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि अगली नियमित शिक्षक पात्रता परीक्षा 26 और 27 फरवरी 2027 को कराई जाएगी। इसके बाद जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में भी परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। आयोग ने वर्ष 2028 में भी नियमित टीईटी आयोजित कराने का भरोसा दिया है।
शिक्षामित्रों की ओर से क्या थी मांग?
याचिका में विशेष टीईटी के शासनादेश और विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विशेष टीईटी में संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को शामिल होने का अवसर दिया गया है, जबकि शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखा गया है। इस आधार पर उन्होंने समान अवसर देने की मांग की थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने दोनों संवर्गों की सेवा शर्तों और परिस्थितियों में अंतर को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।

