रामपुर। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल करने के मामले में पाकिस्तानी नागरिक रही एक महिला शिक्षिका के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच अजीमनगर पुलिस कर रही है। हालांकि जांच के दौरान पुलिस को आवश्यक दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि संबंधित रिकॉर्ड शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आतिशबाज निवासी अख्तर अली की पुत्री फरजाना उर्फ माहिरा अख्तर का जून 1979 में पाकिस्तान निवासी व्यक्ति से निकाह हुआ था। निकाह के बाद वह पाकिस्तान चली गई, जहां उसने पाकिस्तानी नागरिकता प्राप्त कर ली। इसी दौरान उसकी दो बेटियां आलिमा और फुरकाना पैदा हुईं।
करीब तीन वर्ष बाद पति से तलाक होने पर फरजाना दोनों बेटियों के साथ मायके लौट आई। वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत में रहने के आरोप में एलआईयू ने वर्ष 1983 में उसके खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद 25 जून 1985 को सीजेएम कोर्ट ने उसे मुकदमे के निस्तारण तक न्यायालय में उपस्थित रहने का आदेश दिया था।
आरोप है कि फरजाना उर्फ माहिरा अख्तर ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता की जानकारी छिपाकर 22 जनवरी 1992 को शिक्षक पद पर नियुक्ति प्राप्त की। उसकी तैनाती सैदनगर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुम्हरिया में की गई थी।
मामले के उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग की तहरीर पर पुलिस ने हाल ही में फिर से प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्र के अनुसार, जांच के दौरान शिक्षा विभाग से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। पुलिस टीम अब तक तीन बार बीएसए कार्यालय जाकर दस्तावेजों की मांग कर चुकी है, लेकिन अब तक आवश्यक रिकॉर्ड प्राप्त नहीं हो सका है।

