महंगाई नियंत्रण की चुनौती फिर बढ़ी
नई दिल्ली, एजेंसी। पेट्रोल और डीजल की हालिया कीमत बढ़ोतरी ने भारतीय रिजर्व बैंक के सामने महंगाई नियंत्रण की चुनौती फिर बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने बीते दिनों में लगातार ईंधन दाम बढ़ाए हैं, जिसके बाद कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। ऐसे में अब बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर आरबीआई की जून में होने वाली अगली मौद्रिक नीति समिति बैठक पर टिक गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन कीमतों में वृद्धि का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। भारत में अधिकांश माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है और डीजल परिवहन क्षेत्र का मुख्य ईंधन है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत ढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, फल-सब्जियों, एपएमसीजी उत्पादों, निर्माण सामग्री और अन्य रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ता है। इससे खुदरा महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय पहले तक आरबीआई को उम्मीद थी कि खाद्य महंगाई में नरमी और बेहतर आपूर्ति स्थिति के चलते मुद्रास्फीति नियंत्रित रह सकती है। इसके चलते भविष्य में ब्याज दरों में राहत की संभावना भी देखी जा रही थी। लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
आगे खिसक सकती है ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आरबीआई को ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख बनाए रखना पड़ सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक विकास और महंगाई के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी उसकी नीति को जटिल बना सकती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले महीनों में तेल कीमतों और मानसून की स्थिति पर आरबीआई की रणनीति काफी हद तक निर्भर करेगी।

