प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील और उसके बाद सरकार के बड़े फैसलों ने सोने-चांदी के बाजार में ऐसा बदलाव ला दिया है, जिसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमतों में 13,000 रुपये से ज्यादा और चांदी में लगभग 46,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में जिन लोगों ने खरीदारी टाल दी थी, वे अब राहत महसूस कर रहे हैं, जबकि निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी गिरावट की वजह क्या है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
देशवासियों से खास अपील
दरअसल, 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक खास अपील की थी। उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए उन्होंने लोगों से कहा था कि अगर संभव हो तो एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा जैसे गैर-जरूरी खर्चों को टाल दें। उनका कहना था कि भारत को विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत है और सोने का आयात कम होने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट
उस समय इंडियन बुलियन एसोसिएशन के अनुसार 24 कैरेट सोना लगभग 1,53,140 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 2,62,350 रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही थी। लेकिन 28 जून तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। सोना घटकर लगभग 1,39,873 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी की कीमत करीब 2,16,541 रुपये प्रति किलो रह गई, यानी सोना करीब 13,267 रुपये और चांदी लगभग 45,809 रुपये सस्ती हो गई।
हालांकि, केवल प्रधानमंत्री की अपील ही इसकी वजह नहीं रही। इसके पीछे सरकार का एक और बड़ा फैसला भी अहम माना जा रहा है। सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। इसमें कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस दोनों शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य सोने के आयात को कम करना था, ताकि डॉलर की बचत हो सके और व्यापार घाटा नियंत्रित रहे।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। देश में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश सोने का आयात विदेशों से किया जाता है। जब सोने का आयात बढ़ता है, तो बड़ी मात्रा में डॉलर विदेश जाते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि सरकार लंबे समय से गोल्ड इंपोर्ट कम करने की कोशिश करती रही है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद ज्वेलरी की मांग पर भी असर पड़ा है। सेंको गोल्ड के प्रबंध निदेशक और सीईओ सुवंकर सेन के अनुसार, ऊंचे आयात शुल्क का सबसे ज्यादा असर कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहकों पर पड़ेगा। उनका अनुमान है कि इससे आने वाले महीनों में सोने का आयात 10 से 15 प्रतिशत तक घट सकता है।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में मुनाफावसूली देखने को मिली। पश्चिम एशिया से जुड़े तनाव में कुछ नरमी आने और निवेशकों के सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव कम होने से वैश्विक बाजारों में भी सोने और चांदी पर दबाव बना। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।
क्या लंबे समय तक बनी रहेगी गिरावट?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक हालात सामान्य बने रहते हैं, डॉलर मजबूत रहता है और सरकार आयात नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करती, तो सोने और चांदी की कीमतों में फिलहाल बड़ी तेजी देखने को नहीं मिल सकती। हालांकि, किसी भी नए भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर में कमजोरी या वैश्विक आर्थिक संकट की स्थिति में सोना फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत वापसी कर सकता है।
क्या करें ग्राहक या निवेशक?
ऐसे में जो लोग निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट एक अवसर भी मानी जा रही है। वहीं, शादी-ब्याह या अन्य जरूरतों के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों को भी पहले की तुलना में कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल, बाजार की नजर सरकार की आगे की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर टिकी हुई है, क्योंकि यही तय करेंगे कि सोने-चांदी की अगली चाल क्या होगी?

