नई दिल्ली, । आठवें वेतन आयोग से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को काफी उम्मीदें हैं। संभावना जताई जा रही है कि बेसिक सैलरी में खासी बढ़ोतरी होगी।
इसके साथ ही, पेंशन मे भी इजाफा होगा। मौजूदा समय में आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों,पेंशनभोगी संघों और राज्यों में जाकर सुझाव ले रहा हैं। अभी तक आयोग आठ से अधिक राज्यों में कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें कर चुका है।
कर्मचारियों की तरफ से मांग की जा रही है कि फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखा जाए। इसके पीछे कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि बीते कुछ वर्षों में महंगाई काफी बढ़ गई है। ऐसे में कर्मचारी अपने दैनिक खर्च और बढ़ते पारिवारिक खर्चों को देखते हुए अपने मूल वेतन में बढ़ोतरी चाहते हैं।
आयोग कर्मचारी संगठनों की मांग पर किस तरह से विचार करता है, यह आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्पष्ट होगा लेकिन आयोग के समक्ष हितधारकों द्वारा औपचारिक प्रजेंटेशन देने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। फिटमेंट फैक्टर वह आधार होता है जिस पर बेसिक सैलरी (मूल वेतन) तय होती है। बेसिक वेतन बढ़ने से उससे जुड़े अन्य भत्तों जैसे महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस और यात्रा भत्ता में स्वयं बढ़ोतरी हो जाती है।
क्या होती है मूल वेतन के लिए फिटमेंट फैक्टर की गणना
मूल वेतन की गणना फिटमेंट फैक्टर से की जाती है। उसके बाद जो धनराशि निकलकर आती है, उसी को नया मूल वेतन मान लिया जाता है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिस कारण से सात हजार का मूल वेतन (7000 गुना 2.57 = 17990) दोगुना से अधिक बढ़ गया था। अब अगर मूल वेतन 17,990 पर फिटमेंट 3.83 रखा जाता है तो मूल वेतन बढ़कर 68,901 रुपये हो जाएगा। जानकार कहते हैं कि सरकार फिटमेंट फैक्टर में बड़ी बढ़ोतरी करेगी, इसकी उम्मीद कम है क्योंकि सरकार वेतन तय करने से पहले राजस्व के लिहाज से भी सोचेगी। सरकार का ध्यान खजाने पर पड़ने वाले दबाव पर रहेगा।

