देश में डिजिटल भुगतान को अधिक सुरक्षित और गोपनीय बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय भुगतान निगम बैंकों और विभिन्न यूपीआई ऐप्स के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसके तहत यूपीआई लेनदेन के दौरान ग्राहकों का पूरा मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा।
इसके बजाय नंबर आंशिक रूप से छिपाकर प्रदर्शित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा बढ़ाना और साइबर धोखाधड़ी के जोखिम को कम करना है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए बैंकों और यूपीआई ऐप्स के साथ तकनीकी और परिचालन स्तर पर सहमति बनने के बाद नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो भारत का डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के मामले में एक नया मानक स्थापित कर सकता है।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था
प्रस्ताव के अनुसार, यूपीआई ऐप पर भुगतान करते समय या पुराने लेनदेन देखने पर पूरा मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा। उसकी जगह केवल कुछ अंक, जैसे शुरुआती या अंतिम चार अंक ही प्रदर्शित किए जा सकते हैं। यही व्यवस्था भुगतान की पुष्टि, संपर्क सूची और अन्य स्थानों पर भी लागू की जा सकती है। फिलहाल इस पर चर्चा जारी है और अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही यह लागू होगी।
आम उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं की निजी जानकारी पहले से अधिक सुरक्षित रहेगी। मोबाइल नंबर का दुरुपयोग होने की संभावना घटेगी और अनजान लोगों तक व्यक्तिगत जानकारी पहुंचने का खतरा भी कम होगा।
धोखाधड़ी पर लगेगी रोक
विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल नंबर छिपाने से साइबर अपराधियों के लिए ग्राहकों की पहचान करना और उन्हें फर्जी कॉल, मैसेज या सोशल इंजीनियरिंग के जरिए निशाना बनाना पहले की तुलना में कठिन हो जाएगा। इससे फिशिंग, पहचान की चोरी और अनधिकृत संपर्क जैसे जोखिम भी कम होंगे। डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

